Bihar Politics: बिहार कांग्रेस में अंदरूनी कलह अब खुलकर सामने आ गई है. पार्टी लाइन से अलग बयानबाजी और अनुशासनहीनता के आरोप में प्रदेश कांग्रेस अनुशासन समिति ने पूर्व विधायक छत्रपति यादव और रिसर्च विभाग के पूर्व चेयरमैन व पूर्व प्रवक्ता आनंद माधव को छह साल के लिए प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित कर दिया है. इस फैसले से प्रदेश इकाई में सियासी हलचल तेज हो गई है.
अनुशासन समिति का सख्त फैसला
अनुशासन समिति के अध्यक्ष कपिलदेव प्रसाद यादव की ओर से जारी आदेश में कहा गया कि दोनों नेताओं की पार्टी विरोधी गतिविधियां बढ़ती जा रही थीं. मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रदेश प्रभारी और प्रदेश अध्यक्ष से चर्चा के बाद यह कदम उठाया गया. आदेश में साफ लिखा गया कि संगठन की मर्यादा से समझौता बर्दाश्त नहीं होगा.
फैसले की वैधता पर उठे सवाल
कार्रवाई के तुरंत बाद दोनों नेताओं ने पलटवार किया. उन्होंने कहा कि जिस अनुशासन समिति का गठन ही पार्टी संविधान के अनुरूप नहीं हुआ, उसे निष्कासन का अधिकार कैसे मिल सकता है. उनका दावा है कि नियमों के मुताबिक समिति का गठन एआईसीसी महासचिव (संगठन) के हस्ताक्षर से होता है. साथ ही पांच सदस्यों की अनिवार्यता भी होती है. मौजूदा समिति में इन प्रावधानों का पालन नहीं हुआ.
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‘जनाधार कमजोर होगा’ का आरोप
दोनों नेताओं ने कहा कि एआईसीसी सदस्य का निष्कासन केवल अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी स्तर पर ही संभव है. प्रदेश इकाई ऐसा फैसला नहीं ले सकती. उन्होंने प्रदेश नेतृत्व पर आरोप लगाया कि इस तरह के फैसले से बिहार में कांग्रेस का जनाधार और कमजोर होगा.
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