Bihar Cabinet: अब केंद्र और राज्य की परियोजनाओं के लिए रैयत से सीधे भी खरीदी जा सकेगी जमीन. कुल कीमत की दस प्रतिशत अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि भी मिलेगी. राज्य कैबिनेट की बैठक में इसकी मंजूरी दी गयी. कैबिनेट की बैठक के बाद मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग के अपर मुख्य सचिव अरविंद कुमार चौधरी ने बताया कि अब केंद्रीय और राजकीय परियोजनाओं के लिए रैयत से सीधे भी जमीन खरीद हो सकेगी.
इसके तहत आपसी बातचीत, समन्वय या सहमति के आधार पर निर्धारित मुआवजा राशि का भुगतान करते हुये निबंधित दस्तावेज के माध्यम से जमीन प्राप्त की जा सकेगी. इसके लिए बिहार रैयती भूमि क्रय नीति, 2026 के तहत जमीन खरीद होगी.
चार गुणा कीमत मुआवजा में दी जायेगी
इसके तहत शहरी जमीन के बाजार मूल्य या सर्किल दर (एमवीआर) में से जो भी अधिक होगी, उसके दो गुणे की कीमत मुआवजे में दी जायेगी. साथ ही ग्रामीण क्षेत्र में स्थित होने पर बाजार मूल्य या सर्किल दर (एमवीआर) में से जो भी अधिक होगा, उसके चार गुणा कीमत मुआवजा में दी जायेगी. साथ ही इस नीति के तहत शहरी और ग्रामीण दोनों इलाकों में रैयत से जमीन लेने पर कुल कीमत पर 10 प्रतिशत का अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि दी जायेगी.
इस खरीद की जाने वाली जमीन पर स्टाम्प या पंजीयन शुल्क नहीं लगेगा. इससे सरकारी परियोजनाओं के लिए सरकारी भूमि नहीं रहने की स्थिति में रैयती जमीन का अधिग्रहण अधिक आसानी से हो सकेगा. भू-अर्जन की प्रक्रिया में लगने वाले अतिरिक्त समय और लागत में बचत हो सकेगी.राज्य मंत्रिपरिषद की इस बैठक में 27 एजेंडों पर मुहर लगी.
राज्यकर्मियों एवं पेंशनभोगियों को कैशलैस इलाज की सुविधा
बिहार सरकार ने राज्य कर्मियों और उनके आश्रितों को स्वास्थ्य का बड़ा तोहफा दिया है. उनकी वर्षों पुरानी कैशलेस इलाज की मांग को बुधवार को राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक में मंजूरी मिल गयी. मंत्रिपरिषद की बैठक के बाद मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग के अपर मुख्य सचिव अरविंद कुमार चौधरी ने सूचना भवन के प्रथम तल स्थित सभा कक्ष में संवाददाता सम्मेलन में बताया कि स्वास्थ्य विभाग के तहत बिहार विधान मंडल के वर्तमान और पूर्व सदस्यों सहित उनके आश्रितों को आईपीडी में कैशलेस इलाज की सुविधा दी जायेगी.
यह सुविधा अखिल भारतीय सेवा के सेवारत और सेवानिवृत्त पदाधिकारियों सहित उनके आश्रित को भी मिलेगी. साथ ही सुविधा का लाभ राज्य सरकार के नियमित पदाधिकारियों और कर्मियों सहित उनके आश्रित या सेवानिवृत्त पेंशनधारी राज्य कर्मी (पति-पत्नी) और पारिवारिक पेंशनर भी ले सकेंगे.
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शहरी क्षेत्रों में जमीन सर्वेक्षण में अब नगर निकायों के प्रतिनिधि भी होंगे शामिल
शहरी क्षेत्रों में जमीन सर्वेक्षण का काम बेहतर तरीके से करने के लिए राज्य मंत्रिपरिषद ने महत्वपूर्ण प्रस्ताव को मंजूरी दी है. इसके तहत 24 कंडिकाओं को संशोधित किया गया है. अब नगर निकायों के प्रतिनिधि भी शहरी क्षेत्रों के जमीन सर्वेक्षण कार्यों में शामिल हो सकेंगे.
मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग के अपर मुख्य सचिव अरविंद कुमार चौधरी ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में जमीन सर्वेक्षण को लेकर पर्याप्त प्रावधान हैं, लेकिन शहरी क्षेत्रों में ऐसा नहीं होने के कारण अब बेहतर व्यवस्था की गयी है. इससे नगर क्षेत्र में विशेष भू-सर्वेक्षण कार्य में सुविधा और शीघ्रता लायी जा सकेगी. इसे लेकर बिहार विशेष सर्वेक्षण एवं बन्दोबस्त (संशोधन) नियमावली, 2026 को मंजूरी दी गयी है.
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