Bihar Bhumi: बिहार सरकार राज्य के टोपोलैंड को लेकर ठोस नीति बनाने की प्लानिंग कर रही है. ऐसे में अब टोपोलैंड का भी सर्वे कराया जाएगा. बिहार के डिप्टी सीएम सह राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के मंत्री विजय सिन्हा ने सभी जिलों के डीएम से रिपोर्ट भी मांग लिया है. ऐसे में टोपोलैंड की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी और उस जमीन के उपयोग को लेकर प्लानिंग की जा सकेगी.
विजय सिन्हा ने क्या कहा?
डिप्टी सीएम विजय सिन्हा ने कहा, विभाग का उद्देश्य विभागीय नियमों-कानूनों को व्यावहारिक, विवादरहित और पारदर्शी बनाना है. इसे लेकर तेजी और गहनता से काम किया जा रहा है. विभाग की ओर से सभी जिलों के डीएम को आदेश जारी कर दिया गया है. टोपोलैंड की डिटेल जानकारी मांगी गई है.
राजस्व विभाग के अधिकारियों की होगी बैठक
जानकारी के मुताबिक, 10 अप्रैल को विभाग के अधिकारियों की बैठक बुलाई गई है. इस बैठक में टोपोलैंड को लेकर चर्चा की जा सकती है. हर जिले की असर्वेक्षित भूमि और बकास्त भूमि की समीक्षा करने के निर्देश दिए गए हैं. विभाग के अपर सचिव आजीव वत्सराज की ओर से डीएम को लेटर भेजा गया, जिसमें जल्द ही टोपोलैंड जमीन की पहचान कर जानकारी देने की बात कही गई है.
टोपोलैंड का सर्वे कराने से फायदा
डिप्टी सीएम विजय सिन्हा ने यह भी कहा कि बिहार सरकार राज्य में जमीन की व्यवस्थाओं को सुव्यवस्थित करने के प्रयास में जुटी है. टोपोलैंड का सर्वे होने से फ्यूचर में जमीन के विवादों का समाधान, सरकारी योजनाओं के इंप्लीमेंटेशन और सार्वजनिक उपयोग के लिए जमीन उपलब्ध कराने में सहूलियत मिल सकेगी.
क्या होता है टोपोलैंड?
टोपोलैंड बिहार में नदियों के मार्ग बदलने से बनी वह असर्वेक्षित (unsurveyed) जमीन है, जो 1905-1915 के पुराने सर्वे में शामिल नहीं थी. यह मुख्य रूप से सरकारी जमीन मानी जाती है, जिस पर स्वामित्व को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है. ऐसे में सरकार अब इस जमीन का सर्वे कराकर जमीन विवाद सुलझाने की तैयारी में है.
Also Read: पटना के इस इलाके की बदलेगी सूरत, 292.74 करोड़ की लागत से बनेगा फ्लाईओवर
