Bihar Bhumi: बिहार की जिला परिषदें जमीन के दम पर आर्थिक रूप से होगी मजबूत, जानिये क्या है खास तैयारी

Bihar Bhumi: बिहार में जिला परिषदें अपनी आर्थिक ताकत बढ़ाने के लिये खास तैयारी में है. राज्य की जिला परिषदों के पास 39,354 हेक्टेयर से ज्यादा जमीन है जो उन्हें त्रिस्तरीय पंचायती राज संस्थाओं में सबसे बड़ा भू-स्वामी बनाती है.

Bihar Bhumi: बिहार की जिला परिषदें अब सिर्फ योजनाओं को लागू करने वाली एजेंसी नहीं, बल्कि जमीन के दम पर अपनी आर्थिक ताकत बढ़ाने की तैयारी में हैं. राज्य की जिला परिषदों के पास 39,354 हेक्टेयर से ज्यादा जमीन है जो उन्हें त्रिस्तरीय पंचायती राज संस्थाओं में सबसे बड़ा भू-स्वामी बनाती है.

8,582 हेक्टेयर से अधिक जमीन खाली

चौंकाने वाली बात यह है कि इस बड़े संपदा में से 8,582 हेक्टेयर से अधिक जमीन अभी भी खाली पड़ी है. परिषदों की यह जमीन उनकी आय का स्थायी स्रोत है. परिषद की सड़कें, खंता, आहर-पईन, पुल-पुलिया, बांध और डाकबंगला जैसी अचल संपत्तियां इसी जमीन पर खड़ी हैं. इन्हीं संसाधनों के सहारे वित्तीय वर्ष 2023-24 में जिला परिषदों ने 55 करोड़ 39 लाख रुपये से अधिक का राजस्व जुटाया. यह आंकड़े बताते हैं कि जमीन का बेहतर प्रबंधन परिषदों की आर्थिक तस्वीर बदल सकती है.

क्या कहते हैं आंकड़े?

आंकड़ों के मुताबिक, परिषदों की 14,253.95 हेक्टेयर जमीन पर सड़कें, 702.95 हेक्टेयर पर डाकबंगला या निरीक्षण भवन, जबकि 15,815.02 हेक्टेयर में आहर, पईन और बांध बने हैं. इसके बावजूद हजारों हेक्टेयर जमीन ऐसी है, जिसका अभी कोई व्यावसायिक या विकास के लिये उपयोग नहीं हो रहा.

खाली जमीन के लिये तैयार है नई नीति

खाली पड़ी जमीन को आय का साधन बनाने के लिए पंचायती राज विभाग ने बिहार जिला परिषद भू-संपदा लीज नीति 2024 तैयार की है. पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश के अनुसार परिषदों की बहुमूल्य जमीन को लीज पर देने की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया गया है. सरकार का लक्ष्य है कि जिला परिषदें केवल केंद्र और राज्य वित्त आयोग से मिलने वाले अनुदानों पर निर्भर न रहें.

सबसे ज्यादा जमीन इस जिला परिषद के पास

जमीन की जिलावार स्थिति भी बेहद दिलचस्प है. सबसे अधिक जमीन सारण जिला परिषद के पास है, जबकि जहानाबाद जिला परिषद को अपनी जमीन से सबसे अधिक आय हो रही है. यह अंतर बताता है कि जमीन की मात्रा से ज्यादा अहम उसका उपयोग और प्रबंधन है.

पंचायती राज मंत्री क्या बोले?

कानून के तहत जिला परिषदों के जिम्मे कृषि, सिंचाई, जल संसाधन, बागवानी, ग्रामीण विद्युतीकरण, पशुपालन, मत्स्यपालन, लघु उद्योग, स्वास्थ्य, शिक्षा, सामाजिक कल्याण, गरीबी उन्मूलन और ग्रामीण हाट-बाजारों का प्रबंधन है. इन दायित्वों को निभाने के लिए मजबूत वित्तीय आधार जरूरी है. पंचायती राज मंत्री ने बताया कि नयी लीज नीति से परिषदों की खाली जमीनें कमाई का जरिया बनेंगी.

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Author: Preeti Dayal

प्रीति दयाल, प्रभात खबर डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर काम कर रहीं हैं. यूट्यूब पोर्टल सिटी पोस्ट लाइव से पत्रकारिता की शुरुआत की. इसके बाद डेलीहंट और दर्श न्यूज जैसे मीडिया संस्थानों में काम कर चुकीं हैं. डिजिटल मीडिया और कंटेंट राइटिंग में साढ़े 3 साल का अनुभव है. खबरें लिखना, वेब कंटेंट तैयार करने और ट्रेंडिंग सब्जेक्ट पर सटीक और प्रभावी खबरें लिखने का काम कर रहीं हैं. प्रीति दयाल ने पत्रकारिता की पढ़ाई संत जेवियर्स कॉलेज ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी से की. इस दौरान पत्रकारिता से जुड़ी कई विधाओं को सीखा. मीडिया संस्थानों में काम करने के दौरान डिजिटल जर्नलिज्म से जुड़े नए टूल्स, तकनीकों और मीडिया ट्रेंड्स को सीखा. पहली बार लोकसभा चुनाव 2024 और बिहार विधानसभा चुनाव 2025 जैसे बड़े चुनावी कवरेज में काम करने का अवसर मिला. इस दौरान बिहार की राजनीति, चुनावी रणनीतियों, राजनीतिक दलों और प्रमुख नेताओं से जुड़े कई प्रभावशाली और पाठकों की रुचि के अनुसार कंटेंट तैयार किए. चुनावी माहौल को समझते हुए राजनीतिक विश्लेषण और ट्रेंडिंग मुद्दों पर आधारित खबरों को आसान और प्रभावी भाषा में तैयार करना कार्यशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है. कंटेंट रिसर्च, SEO आधारित लेखन, सोशल मीडिया फ्रेंडली कंटेंट तैयार करना और तेजी से बदलते न्यूज वातावरण में काम करना प्रमुख क्षमताओं में शामिल है. बिहार की राजनीति, सामाजिक मुद्दों, सिनेमा और देश-दुनिया की महत्वपूर्ण घटनाओं पर रुचि और समझ है. टीम के साथ बेहतर समन्वय बनाकर काम करना और समय सीमा के अंदर गुणवत्तापूर्ण काम पूरा करना कार्यशैली का हिस्सा है. प्रीति दयाल का उद्देश्य डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में लगातार सीखते हुए अपनी पत्रकारिता कौशल को और बेहतर बनाना और पाठकों तक विश्वसनीय और प्रभावशाली खबरें पहुंचाना है.

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