Bihar ayushman bharat: बिहार में आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB-PMJAY) का दायरा लगातार बढ़ रहा है. राज्य में गरीब और जरूरतमंद परिवारों को गंभीर बीमारियों के इलाज में आर्थिक सुरक्षा देने वाली इस योजना के तहत अब तक करोड़ों आयुष्मान कार्ड बनाए जा चुके हैं. केंद्र सरकार की ओर से लोकसभा में 20 मार्च 2026 को दी गयी जानकारी के अनुसार, 28 फरवरी 2026 तक बिहार में 4.12 करोड़ आयुष्मान कार्ड बनाए जा चुके थे. इनमें 70 वर्ष और उससे अधिक उम्र के बुजुर्गों के लिए जारी 3.96 लाख आयुष्मान वय वंदना कार्ड भी शामिल हैं.
1.32 करोड़ परिवारों तक पहुंचा योजना का दायरा
केंद्र सरकार के अनुसार बिहार में मूल रूप से करीब 1.21 करोड़ परिवार आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के लिए पात्र हैं. इसके अलावा एक अप्रैल 2024 से आशा कार्यकर्ताओं, आंगनबाड़ी सेविका और सहायिकाओं के 3.12 लाख परिवारों को भी योजना में शामिल किया गया. अक्टूबर 2024 में 70 वर्ष और उससे अधिक उम्र के सभी वरिष्ठ नागरिकों को योजना में शामिल किए जाने के बाद बिहार में कवरेज का दायरा करीब 1.32 करोड़ परिवारों तक पहुंच गया.
1,188 अस्पतालों में मिल रही कैशलेस इलाज की सुविधा
बिहार में आयुष्मान योजना के तहत अस्पतालों का नेटवर्क भी लगातार बढ़ा है. 28 फरवरी 2026 तक राज्य में 1,188 अस्पताल सूचीबद्ध थे. इनमें 433 सरकारी और 755 निजी अस्पताल शामिल हैं. केंद्र सरकार के आंकड़ों के मुताबिक पिछले तीन वित्तीय वर्षों में 305 निजी अस्पतालों को योजना के तहत सूचीबद्ध किया गया. इससे लाभार्थियों को सरकारी अस्पतालों के साथ निजी अस्पतालों में भी इलाज की सुविधा मिल रही है.
31.33 लाख अस्पताल दाखिले, ₹4,645 करोड़ से अधिक की स्वीकृति
28 फरवरी 2026 तक बिहार में आयुष्मान योजना के तहत 31.33 लाख अस्पताल दाखिले अधिकृत किये गये हैं. इन उपचारों के लिए कुल ₹4,645.57 करोड़ की राशि अधिकृत हुई है. इनमें पिछले तीन वित्तीय वर्षों में 15.09 लाख अस्पताल दाखिले और ₹2,026.32 करोड़ की अधिकृत राशि शामिल है.
एक साल में एक हजार करोड़ से अधिक की बचत का दावा
जून 2025 में केंद्र सरकार ने बताया था कि बिहार में आयुष्मान भारत योजना के माध्यम से लाभार्थियों के जेब से होने वाले चिकित्सा खर्च में एक वर्ष में ₹1,000 करोड़ से अधिक की बचत हुई. उसी समय बिहार में सभी पात्र परिवारों की कवरेज 100 प्रतिशत होने की जानकारी दी गयी थी. राज्य में मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना को भी आयुष्मान भारत के साथ जोड़ा गया है, जिससे स्वास्थ्य सुरक्षा का दायरा और बढ़ा है.
70 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गों पर भी विशेष फोकस
अक्टूबर 2024 में आयुष्मान भारत योजना के विस्तार के बाद 70 वर्ष और उससे अधिक उम्र के सभी वरिष्ठ नागरिकों को आयुष्मान वय वंदना योजना के तहत कवरेज दिया गया. फरवरी 2026 तक बिहार में करीब 3.96 लाख आयुष्मान वय वंदना कार्ड जारी किये जा चुके थे. यह पहल बुजुर्गों के इलाज के खर्च को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है.
आगे अस्पतालों का नेटवर्क और कार्ड बनाने की गति बढ़ाने पर जोर
फरवरी 2026 में बिहार स्वास्थ्य सुरक्षा समिति की समीक्षा बैठक में अधिकारियों को आयुष्मान कार्ड बनाने की गति बढ़ाने, सूचीबद्ध अस्पतालों का नेटवर्क विस्तार करने और मैदानी स्तर पर निरीक्षण मजबूत करने का निर्देश दिया गया था. समीक्षा में आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन और क्लेम प्रोसेसिंग की स्थिति पर भी चर्चा हुई.
अस्पतालों की गुणवत्ता और पारदर्शिता पर भी फोकस
मार्च 2026 में बिहार स्वास्थ्य सुरक्षा समिति और एशियन डेवलपमेंट रिसर्च इंस्टीट्यूट के सहयोग से 'आयुष्मान मंथन' कार्यशाला का आयोजन किया गया. पांच चरणों में आयोजित इस पहल का उद्देश्य अस्पतालों की भागीदारी बढ़ाने, सेवा की गुणवत्ता और पारदर्शिता सुधारने पर जोर देना था. आयोजकों के अनुसार योजना से जुड़े 92 प्रतिशत निजी अस्पतालों के प्रशिक्षण का काम पूरा हो चुका था.
डिजिटल निगरानी और शिकायत व्यवस्था को मजबूत करने की तैयारी
योजना के बेहतर क्रियान्वयन के लिए डिजिटल मॉनिटरिंग, शिकायत निवारण, नियमित ऑडिट और जागरूकता अभियान पर जोर दिया जा रहा है. केंद्र के अनुसार अस्पतालों की सूचीबद्धता से जुड़ी समस्याओं के लिए 14413 हेल्पलाइन उपलब्ध है. अस्पतालों के दावों के निपटारे के लिए सामान्य नियमों के तहत राज्य के अस्पतालों के दावों का निपटारा 15 दिनों और दूसरे राज्यों में पोर्टेबिलिटी के मामलों का 30 दिनों के भीतर करने का प्रावधान है.
ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में सबसे बड़ी चुनौती
आयुष्मान योजना का दायरा बढ़ने के बावजूद बिहार में ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच अभी बड़ी चुनौती है. मार्च 2026 में सामने आये CAG ऑडिट में लाभार्थी सत्यापन, अस्पतालों की सूचीबद्धता, क्लेम निपटारे, जागरूकता और निगरानी से जुड़ी कमियां सामने आयीं. ऑडिट में दावा किया गया कि मार्च 2024 तक संशोधित 6.18 करोड़ लाभार्थी लक्ष्य के मुकाबले 2.56 करोड़ यानी करीब 41 प्रतिशत का ही सत्यापन हुआ था. हालांकि बाद के वर्षों में कार्ड निर्माण और कवरेज में तेजी आयी है.
क्लेम भुगतान में देरी दूर करना भी जरूरी
मई 2026 में बिहार के कई सूचीबद्ध अस्पतालों ने आयुष्मान योजना के तहत भुगतान में देरी की शिकायत की थी. अस्पतालों के अनुसार कई दावे महीनों से लंबित थे, जिससे दवाओं, कर्मचारियों के वेतन और अस्पताल संचालन पर दबाव पड़ रहा था. स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने भुगतान प्रक्रिया में देरी स्वीकार करते हुए इसे जल्द सामान्य करने की बात कही थी. उस समय बिहार में आयुष्मान के तहत 1,298 अस्पताल सूचीबद्ध होने की जानकारी दी गयी थी, जिनमें 434 सरकारी और 864 निजी अस्पताल शामिल थे.
आगे की प्राथमिकताएं
बिहार में आयुष्मान योजना को और प्रभावी बनाने के लिए आने वाले समय में पांच क्षेत्रों पर विशेष जोर जरूरी होगा. ग्रामीण और प्रखंड स्तर पर अस्पतालों की संख्या बढ़ाना, विशेषज्ञ इलाज की सुविधा को जिला स्तर तक मजबूत करना, आयुष्मान कार्ड से वंचित पात्र लोगों की पहचान कर कार्ड बनाना, अस्पतालों के क्लेम का समय पर भुगतान करना और फर्जीवाड़े पर डिजिटल निगरानी बढ़ाना इसकी प्रमुख प्राथमिकताएं हो सकती हैं.
स्वास्थ्य सेवाओं के डिजिटल विस्तार के साथ आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन को भी मजबूत किया जा रहा है. इससे मरीजों के स्वास्थ्य रिकॉर्ड को डिजिटल रूप से जोड़ने और स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक समन्वित बनाने में मदद मिल सकती है. राष्ट्रीय स्तर पर मई 2026 तक ABHA से जुड़े डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड की संख्या 100 करोड़ पार कर चुकी थी और बिहार अग्रणी राज्यों में शामिल था.
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