बिहार में 10 लाख किसानों का रजिस्ट्रेशन पूरा, रजिस्ट्री का बना नया रिकॉर्ड, डिप्टी सीएम का बड़ा ऐलान

Bihar Agristack Campaign: एग्रीस्टैक महाअभियान के तहत बिहार ने डिजिटल कृषि की दिशा में बड़ी सफलता हासिल की है. राज्य में 10 लाख से अधिक किसानों का रजिस्ट्रेशन पूरा हो चुका है. यूनिक किसान आईडी से किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ आसानी से और पारदर्शी तरीके से मिलेगा.

By Paritosh Shahi | January 10, 2026 8:23 PM

Bihar Agristack Campaign: राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग और कृषि विभाग द्वारा चलाए जा रहे संयुक्त एग्रीस्टैक महाअभियान ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है. बिहार में अब तक 10 लाख 41 हजार 341 किसानों का पंजीकरण पूरा हो चुका है. इसके साथ ही राज्य ने 10 लाख किसान रजिस्ट्री का अहम आंकड़ा पार कर लिया है. एक ही दिन में रजिस्ट्रेशन की संख्या में करीब 42 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. इसे राज्य में डिजिटल खेती की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है.

क्या बोले डिप्टी सीएम

उपमुख्यमंत्री एवं राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने इस सफलता का श्रेय दोनों विभागों के बेहतर तालमेल, जिला प्रशासन की सक्रियता और फील्ड में काम कर रहे कर्मचारियों को दिया है.

उन्होंने बताया कि यूनिक किसान आईडी बनने से किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि समेत केंद्र और राज्य सरकार की सभी योजनाओं का लाभ आसानी से समय पर और बिना किसी परेशानी के मिल सकेगा. इससे किसानों और उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी.

सचिव ने दी जानकारी

सरकार का लक्ष्य है कि राज्य का हर पात्र किसान डिजिटल रूप से सशक्त बने. इसी वजह से इस महाअभियान की अवधि को बढ़ाकर 21 जनवरी तक कर दिया गया है. राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के प्रधान सचिव सीके अनिल ने बताया कि 9 जनवरी की शाम 8 बजे तक 1 लाख 86 हजार 73 किसानों का रजिस्ट्रेशन हुआ, जो हर दिन के लक्ष्य का करीब 69 प्रतिशत है. यह संख्या 8 जनवरी की तुलना में काफी अधिक रही.

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किस जिले के प्रदर्शन सबसे अच्छा

जिलों के प्रदर्शन की बात करें तो मुजफ्फरपुर, वैशाली, अररिया, भागलपुर और कटिहार ने लक्ष्य से ज्यादा रजिस्ट्रेशन कर अच्छा काम किया है. मधुबनी, बेगूसराय, समस्तीपुर, सीवान, सारण और कैमूर जैसे जिलों में रजिस्ट्रेशन की गति अभी धीमी है. कुछ जिलों में राज्य औसत से भी कम प्रगति हुई है, जहां सुधार के लिए प्रयास किए जा रहे हैं.

फिलहाल ई-केवाइसी और रजिस्ट्रेशन के बीच अंतर बना हुआ है. इस कमी को दूर करने के लिए जागरूकता अभियान और तकनीकी मदद तेज की जा रही है. प्रशासन को उम्मीद है कि तय समय में लक्ष्य पूरा कर लिया जाएगा.

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