बिहार पुलिस के भत्तों से गायब हुई साइकिल! जारी नयी मार्गदर्शिका में साइकिल भत्ता का जिक्र तक नहीं

Bihar News: बिहार पुलिस के किस सिपाही-हवलदार ने आखिरी बार साइकिल भत्ता लिया था? बिहार पुलिस में इस सवाल का उत्तर शायद ही किसी के पास है. थानों अथवा पुलिकर्मियों की ओर से इसकी कोई मांग भी नहीं आ रही है. इसी का परिणाम है कि पुलिस मुख्यायल द्वारा हाल ही में यात्रा भत्तों का समय से भुगतान के लिए जारी एसओपी में साइकिल भत्ता गायब है.

Bihar News: बिहार पुलिस की यात्रा भत्ता को लेकर जारी नयी मार्गदर्शिका में साइकिल भत्ता का जिक्र तक नहीं है. सिपाही से लेकर हवलदार तक को प्रतिमाह 200 रुपये साइकिल भत्ता देने का प्रावधान है. 2017 में इसमें बढ़ोतरी की गयी थी. इससे पहले यह 30 रुपये प्रतिमाह था. जमादार से इंस्पेक्टर तक के पुलिसकर्मियों को ढाई हजार रुपये वाहन भत्ता मिलता है, लेकिन इसके एवज में सिटी अलाउंस बंद कराना पड़ता है. जिन दारोगा-इंस्पेक्टर पर ड्राइविंग लाइसेंस या गाड़ी उनके नाम नहीं है उनको तो वाहन भत्ता भी नहीं मिलता है. इस संबंध में एक अधिकारी का कहना था कि, दरअसल, डिजिटल युग और बढ़ती सुविधाओं के साथ पुलिस विभाग में अब साइकिल का प्रयोग लगभग खत्म हो चुका है.

पेट्रोलिंग, थाने आने-जाने, या छोटे अभियानों के लिए अब बाइक, जीप और अन्य संसाधनों का प्रयोग किया जाता है. साइकिल भत्ता की राशि विभागीय नियमों में अब भी तय है, लेकिन इसे लेने की प्रक्रिया कई स्तरों से होकर गुजरती है. ऐसे में यह एक “मृत प्रावधान” जैसा बनकर रह गया है. एक पुलिस कर्मी ने बताया कि वह मोटरसाइकिल से चलते हैं और बाइक से प्रति किमी 5 रुपये मिलते हैं. साइकिल भत्ता उनके लिए घाटे के अलावा उसको लेने की पेचीदा प्रक्रिया में फंसना है.

इन कार्यों के लिए मिलता है यात्रा भत्ता

पुलिस हस्तक में यात्रा भत्ता को चार मदों में बांटा है. एक स्थान से दूसरे स्थान में आने-जाने का भाड़ा, बड़ी यात्रा के दरम्यान की गयी छोटी-छोटी यात्रा, जैसे घर से स्टेशन, स्टेशन से होटल, होटल से प्रशिक्षण स्थल, कोर्ट, कार्यालय आदि के लिए मील भत्ता तथा यात्रा के दरम्यान 8 किलोमीटर से अधिक दूरी पर बिताये गये प्रत्येक दिन के लिए दैनिक भत्ता. स्थानातंरण के कारण सामान ढ़ोने का भाड़ा भी इसमें शामिल है.

यात्रा भत्ता : एक नजर

  • 2024- 25 : 454159395 रुपये
  • 2025- 26 (24 जून) : 15254347 रुपये

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