Bharat Tiwari Encounter: भोजपुर के भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में बिहार पुलिस मुख्यालय ने पहली बार खुलकर अपनी गलती मान ली है. लॉ एंड ऑर्डर के एडीजी सुधांशु कुमार ने सोमवार को पटना में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि 16 जून को जब पुलिस टीम आरोपी के खिलाफ कार्रवाई करने गई थी, तब उसे सही तरीके से हैंडल नहीं किया गया और पुलिस के स्तर पर गंभीर चूक हुई थी.
इस बड़ी लापरवाही को देखते हुए विभाग ने कड़ा एक्शन लिया है. मामले से जुड़े SHO, दो दरोगा, एक एएसआई और एक सिपाही को तुरंत सस्पेंड कर दिया गया है. अब इस पूरे मामले की कमान शाहाबाद रेंज के डीआईजी को सौंपी गई है. फॉरेंसिक और दूसरी वैज्ञानिक जांच भी तेजी से चल रही है.
हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज करेंगे न्यायिक जांच
इस घटना को लेकर बढ़ते विवाद को देखते हुए राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. एडीजी ने बताया कि इस पूरे मामले की जांच के लिए एक न्यायिक आयोग का गठन किया गया है, जिसकी अध्यक्षता हाईकोर्ट के एक रिटायर्ड जज करेंगे.
यह आयोग बिना किसी दबाव के पूरी घटना की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच करेगा और अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगा. चूंकि मामला अब न्यायिक आयोग के पास चला गया है, इसलिए पुलिस मुख्यालय अब इस पर और ज्यादा टिप्पणी करने से बच रहा है.
एनकाउंटर कभी पुलिस की कामयाबी नहीं हो सकता
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एडीजी सुधांशु कुमार ने एनकाउंटर को लेकर एक बहुत बड़ी बात कही. उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसी भी एनकाउंटर को पुलिस की उपलब्धि या कामयाबी नहीं माना जा सकता. उन्होंने समझाया कि कानून पुलिस को सिर्फ आत्मरक्षा में सीमित बल प्रयोग करने का अधिकार देता है, वह भी तब जब पुलिसकर्मियों की जान पर बन आए. उन्होंने यह भी कहा कि हर मुठभेड़ की बारीकी से जांच होना बेहद जरूरी है, ताकि यह साफ हो सके कि पुलिस की कार्रवाई कानून के दायरे में ही हुई थी.
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मामले पर गरमाई सियासत
भरत तिवारी एनकाउंटर को लेकर बिहार की राजनीति में भी भारी घमासान मचा हुआ है. विपक्ष लगातार पुलिस की इस कार्रवाई को कटघरे में खड़ा कर रहा है और निष्पक्ष जांच की मांग पर अड़ा है. दूसरी तरफ, सत्ता पक्ष के भी कुछ नेताओं ने इस घटना पर चिंता जताते हुए साफ-सुथरी जांच की बात कही है. अब नेता हो या जनता, सभी की नजरें न्यायिक आयोग की आने वाली जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं.
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