घर लौट रहे हैं बिहार के दो शहीद बेटे, अंतिम दर्शन को बिहटा एयरपोर्ट पर उमड़ा जनसैलाब, असम विमान हादसे में गई थी जान

IAF Plane Crash: असम विमान हादसे में शहीद हुए बिहार के दो वीर सपूतों का पार्थिव शरीर कुछ ही देर में बिहटा एयरफोर्स स्टेशन पहुंचेगा. अंतिम दर्शन के लिए बिहटा से लेकर उनके पैतृक गांवों तक लोगों का जनसैलाब उमड़ पड़ा है.

IAF Plane Crash: (मोनु कुमार मिश्रा, बिहटा) असम के जोरहाट एयरबेस पर हुए एएन-32 विमान हादसे में बिहार के दो वीर सपूत शहीद हो गए हैं. जिनका पार्थिव शरीर रविवार को विशेष वायुसेना विमान से बिहटा एयरफोर्स स्टेशन पहुंचने वाला है. शहीद अग्निवीर दानिश आलम और फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम कुमार को अंतिम श्रद्धांजलि देने के लिए बिहटा से लेकर उनके पैतृक गांवों तक लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी है.

जोरहाट में हुआ सैन्य सम्मान समारोह

भारतीय वायुसेना की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, जोरहाट एयरबेस पर शहीदों को सैन्य सम्मान के साथ पुष्पचक्र अर्पित किया गया. इसके बाद शहीदों के पार्थिव शरीर को उनके गृह राज्यों के लिए रवाना किया गया.रविवार को फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम कुमार और अग्निवीर दानिश आलम का पार्थिव शरीर बिहटा एयरफोर्स स्टेशन पहुंचेगा, जहां उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि दी जाएगी.

शहीद जवान शुभम और दानिश की तस्वीर

कौन थे अग्निवीर दानिश आलम?

भोजपुर जिले के कोईलवर प्रखंड स्थित कमरियांव गांव निवासी दानिश आलम वर्ष 2025 में भारतीय वायुसेना में अग्निवीर के रूप में शामिल हुए थे. कम समय में ही उन्होंने अपनी कर्तव्यनिष्ठा, अनुशासन और देशसेवा के जज्बे से अलग पहचान बनाई थी. उनकी शहादत की खबर मिलते ही पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई.

फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम कुमार पर पूरे बिहार को गर्व

जहानाबाद जिले के हुलासगंज प्रखंड के बनवरिया गांव निवासी फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम कुमार भारतीय वायुसेना के होनहार अधिकारी थे. उनकी शहादत की खबर से परिवार, गांव और पूरे जिले में मातम पसरा है. वहीं लोगों को उनके सर्वोच्च बलिदान पर गर्व भी है.

गांवों में सैन्य सम्मान के साथ होगा अंतिम संस्कार

बिहटा एयरफोर्स स्टेशन पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम के बाद अग्निवीर दानिश आलम का पार्थिव शरीर सड़क मार्ग से भोजपुर के कमरियांव गांव ले जाया जाएगा. वहीं फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम कुमार का पार्थिव शरीर जहानाबाद के बनवरिया गांव पहुंचेगा. रास्ते भर लोग पुष्पवर्षा और श्रद्धांजलि अर्पित कर अपने वीर सपूतों को अंतिम विदाई देंगे.

बनवरिया गांव स्थित उच्च विद्यालय परिसर में शुभम कुमार को अंतिम सलामी दी जाएगी. वहीं कमरियांव गांव में दानिश आलम का अंतिम संस्कार पूरे सैन्य सम्मान और राजकीय गरिमा के साथ किया जाएगा.

तिरंगे के साथ अंतिम दर्शन का इंतजार

बिहटा एयरफोर्स स्टेशन, कोईलवर, जहानाबाद और आसपास के क्षेत्रों में सुबह से ही बड़ी संख्या में लोग जुटने लगे हैं. युवा, बुजुर्ग और महिलाएं हाथों में तिरंगा लेकर भारत माता की जय और अमर शहीद अमर रहें के नारे लगा रहे हैं. हर कोई अपने वीर सपूतों के अंतिम दर्शन का इंतजार कर रहा है.

बचपन के दोस्त ने सुनाई दानिश की कहानी

शहीद अग्निवीर दानिश आलम के बचपन के मित्र विश्वजीत तिवारी ने बताया कि दानिश शुरू से ही मिलनसार, अनुशासित और देशभक्ति की भावना से भरे हुए थे. उन्होंने कहा कि दानिश का सपना देश की सेवा करना था. वायुसेना में चयन होने के बाद वे बेहद खुश रहते थे और अपने भविष्य को लेकर उत्साहित थे.

विश्वजीत ने कहा कि दानिश ने देश की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया है. उनकी कमी कभी पूरी नहीं हो सकती, लेकिन उनकी वीरता और देशभक्ति हमेशा युवाओं को प्रेरित करती रहेगी.

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Published by: Abhinandan Pandey

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