प्रशिक्षु शिक्षकों के खाने में मिली छिपकली बीडीओ बोले, अचार में मेढ़क का बच्चा था

अनुमंडल मुख्यालय स्थित शिक्षक शिक्षा महाविद्यालय (पीटीइसी) में गुरुवार को प्रशिक्षु शिक्षकों के दोपहर के भोजन के दौरान उस समय अफरा-तफरी मच गयी जब भोजन की थाली में छिपकली मिली.

प्रतिनिधि, मसौढ़ी अनुमंडल मुख्यालय स्थित शिक्षक शिक्षा महाविद्यालय (पीटीइसी) में गुरुवार को प्रशिक्षु शिक्षकों के दोपहर के भोजन के दौरान उस समय अफरा-तफरी मच गयी जब भोजन की थाली में छिपकली मिली. इसके बाद शिक्षकों ने जमकर हंगामा किया. घटना के बाद कुछ शिक्षकों की तबीयत बिगड़ गयी और उल्टी की शिकायत सामने आयी जिससे पूरे परिसर में हड़कंप मच गया. मिली जानकारी के अनुसार, पिछले दिनों से कुछ विद्यालयों के 155 शिक्षकों का छह दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण स्थानीय पीटीइसी में चल रहा है. गुरुवार की दोपहर एक प्रशिक्षु शिक्षक के भोजन की थाली में परोसे गये भुजिया में छिपकली दिखायी दी. इसके बाद अन्य शिक्षक भी घबरा गये. कुछ ही देर में कई शिक्षकों को मतली और उल्टी होने लगी. एक प्रशिक्षु शिक्षक को एक निजी अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा. हालांकि बाद में उसकी स्थिति सुधर गयी. इधर इस घटना के बाद प्रशिक्षु शिक्षकों ने क्लास में जाने से मना कर दिया और वे हंगामा करने लगे. काफी मान मनौव्वल और समझाने-बुझाने के बाद ही वे क्लास रूम में गये. शिक्षकों ने किया हंगामा, एसडीओ के आदेश पर जांच करने पहुंचे थे बीडीओ इधर, एसडीओ के निर्देश पर मामले की जांच करने बीडीओ प्रभाकर कुमार शिक्षक शिक्षा महाविद्यालय पहुंचे और जांच-पड़ताल की. बीडीओ ने भोजन में छिपकली मिलने के आरोप को खारिज करते हुए कहा कि भोजन में कोई छिपकली नहीं थी, बल्कि परोसे गये भोजन के आचार में मेंढक का बच्चा था. उन्होंने किसी प्रशिक्षु शिक्षक को भोजन के बाद अस्पताल भेजे जाने की बात से इंकार किया. बीडीओ इसे मेढक का बच्चा बता रहे और आचार मे मिलने की बात कह रहे हैं, जबकि भुजिया में छिपकली किस कदर फ्राई हो गयी है दिखाई दे रहा है. शिक्षकों का आरोप-भोजन की गुणवत्ता पहले से 
खराब रहती है प्रशिक्षु शिक्षकों ने महाविद्यालय प्रशासन पर अन्य कई गंभीर आरोप भी लगाये. उन्होंने कहा कि पीटीइसी में भोजन की गुणवत्ता पहले से ही खराब रहती है, लेकिन शिकायतों के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती. इधर इस संबंध में जब महाविद्यालय की प्राचार्य रश्मि मिश्रा से संपर्क करने का प्रयास किया गया तो उनके मोबाइल की घंटी तो बजी, लेकिन मोबाइल रिसीव नहीं किया गया.

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Author: MAHESH KUMAR

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