पटना : बिहार में एडीजी (मुख्यालय) सुनील कुमार ने कहा कि शहर के बड़े ऑटोमोबाइल कारोबारी निखिल प्रियदर्शी पर अनुसूचित जाति की एक लड़की ने जो यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है, वह सही पाया गया है. बुधवार को पुलिस मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में उन्होंने यह जानकारी दी. उन्होंने कहा कि सीआइडी के एडीजी विनय कुमार ने इस मामले की जांच अपने स्तर पर करवायी थी, जिसमें यह मामला पूरी तरह से सही पाया.
निखिल की गिरफ्तारी के लिए देशभर में छापेमारी
इसके बाद आरोपित निखिल प्रियदर्शी की गिरफ्तारी के लिए देश भर में छापेमारी चल रही है. केंद्रीय गृह मंत्रालय से उसके खिलाफ लिए ‘लुक आउट’ नोटिस जारी करने का अनुरोध फिर से किया गया है. गौरतलब है कि इस मामले में पहले भी केंद्र से ऐसा अनुरोध किया जा चुका है. उन्होंने कहा कि सीआइडी की रिपोर्ट में यह बात सामने आयी है कि पीड़िता ने जो एफआइआर दर्ज करवायी है, उसमें चार लोगों निखिल प्रियदर्शी, उसका भाई मनीष प्रियदर्शी, पिता कृष्ण बिहारी प्रसाद और एक मित्र संजीत कुमार शर्मा को नामजद अभियुक्त बनाया है. इसमें अब तक सिर्फ निखिल पर लगे आरोप सही पाये गये हैं. अन्य तीनों पर लगे आरोपों की जांच चल रही है. इसके बाद ही मामला स्पष्ट हो पायेगा. एडीजी ने कहा कि कांग्रेस नेता ब्रजेश पांडेय इस मामले में अप्राथमिक अभियुक्त हैं. उन पर लगे सभी आरोपों की जांच की जा रही है. उनके खिलाफ साक्ष्य प्राप्त होने पर उचित कार्रवाई की जायेगी. बिना साक्ष्य मिले कोई कार्रवाई नहीं की जा सकती है.
