पटना. पटना जिले में रामनगर से कच्ची दरगाह के बीच फोरलेन सड़क के निर्माण में 30 एकड़ जमीन को लेकर पेच फंसा है. फतुहा व दीदारगंज अंचल में 30 एकड़ जमीन की जांच हो रही है कि यह रैयती या सरकारी है. इसको लेकर कागजात को खंगाला जा रहा है. इस वजह से दोनों अंचलों में जिला प्रशासन की ओर से जमीन का सीमांकन होने के बावजूद जमीन अधिग्रहण में बाधा हो रही है. जानकारों के अनुसार फतुहा अंचल में लगभग 25 एकड़ जमीन बकास्त या गैर मालिक है. वहीं, दीदारगंज अंचल में पांच एकड़ जमीन बकाश्त है. इस जमीन के रैयती या सरकारी होने से संबंधित रिपोर्ट पटना सिटी डीसीएलआर को देनी है. संबंधित जमीन को लेकर दावेदार रैयतों को नोटिस किया गया है. रैयतों की ओर से दिये गये कागजात के आधार पर उसकी जांच की जा रही है. जांच रिपोर्ट का इंतजार है. इसके बाद ही अंतिम रूप से निर्णय लिया जायेगा. रैयती जमीन होने पर रैयतों को मुआवजा भुगतान होगा. सरकारी जमीन होने पर केवल स्थानांतरित किया जायेगा. इसके लिए गांव में शिविर लगा कर कागजात की जांच कर मुआवजा भुगतान में तेजी लाने को कहा गया था.
मुआवजा भुगतान में हो रही है देरी
रामनगर-कच्ची दरगाह एनएच-119डी सड़क निर्माण में भी रैयतों को मुआवजा भुगतान में देरी हो रही है. रैयतों को मात्र 2.72 करोड़ रुपये का भुगतान हुआ है. फोरलेन निर्माण के लिए फतुहा व दीदारगंज अंचल में 187 एकड़ जमीन की जरूरत है. इसके लिए रैयतों को लगभग 207 करोड़ मुआवजा देना है. इसके लिए 55 आवेदन मिले हैं. इनमें 20 आवेदनों में मुआवजा भुगतान किया गया है. जिला प्रशासन ने 2.81 एकड़ जमीन के लिए 2.72 करोड़ रुपये का भुगतान किया है. हाल ही में डीएम ने अधिकारियों को विकास योजनाओं के मार्ग में आ रहे स्ट्रक्चर का नियमानुसार स्थानांतरण करने, अतिक्रमण हटाने, मुआवजा भुगतान में तेजी लाने व जनहित की योजनाओं को गुणवतापूर्ण व समयसीमा में करने का निर्देश दिया था.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
