Patna News : होली के दौरान 150 से अधिक घायल 47 को भर्ती कर किया गया इलाज

होली के मौके पर अलग-अलग तरह की घटनाओं में घायल होने वाले करीब 150 से अधिक लोग अस्पताल पहुंचे. इनमें करीब 47 मरीजों काे इमरजेंसी वार्ड में भर्ती किया गया.

संवाददाता, पटना : होली के मौके पर अलग-अलग तरह की घटनाओं में घायल होने वाले करीब 150 से अधिक लोग अस्पताल पहुंचे. रंग खेलने के दौरान तेज रफ्तार बाइक चलाने में सड़क पर दुर्घटना का शिकार होने, ऊंचाई से गिरने वाले, होली के हुड़दंग के दौरान एक दूसरे से मारपीट करने वाले लोग शामिल थे. इसके अलावा आंख में रंग चले जाने की तकलीफ लेकर भी कुछ लोग अस्पताल पहुंचे. ये मामले बीते तीन दिनों के अंदर शहर के आइजीआइएमएस, पीएमसीएच, गार्डिनर रोड अस्पताल, राजवंशी नगर स्थित एलएनजेपी हड्डी अस्पताल और पटना एम्स अस्पताल में आये हैं.

47 मरीजों की हालत खराब होने पर लाया गया अस्पताल

पीएमसीएच, पटना एम्स और आइजीआइएमएस के ट्रॉमा सेंटर में बीते दो दिनों में करीब 150 से अधिक लोग घायल अवस्था में इलाज के लिए पहुंचे. इनमें करीब 47 मरीज जिनकी हालत गंभीर थी उनको इमरजेंसी वार्ड में भर्ती किया गया. वहीं आइजीआइएमएस के मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ मनीष मंडल ने बताया कि 14 मार्च के दिन ओपीडी बंद थी, इमरजेंसी में मरीजों का इलाज किया गया. होली के दिन शनिवार और रविवार के दिन काफी संख्या में लोग इलाज कराने पहुंचे. सड़क दुर्घटना में घायल 16 लोग पहुंचे थे. वहीं दूसरी ओर पीएमसीएच में भी 12 और एलएनजेपी हड्डी अस्पताल में इलाज कराने पहुंचे चार मरीजों को भर्ती किया गया. डॉक्टरों के मुताबिक सड़क दुर्घटना व हमले में घायल कई लोग पटना के अलावा दूसरे जिलों से इलाज कराने आये. वहीं पीएमसीएच के अधीक्षक डॉ आइएस ठाकुर ने बताया कि होली को लेकर डॉक्टरों की टीम मुस्तैद थी.

अस्पतालों में इमरजेंसी में ज्यादा दिखी भीड़

होली व शनिवार के चलते आइजीआइएमएस और पटना एम्स में एक चौथाई ही मरीज इलाज कराने पहुंचे थे. दरअसल, इन दोनों मेडिकल कॉलेज अस्पतालों में शुक्रवार को होली की सरकारी छुट्टी थी. लेकिन, अगले दिन यानी शनिवार को अस्पताल की ओपीडी रोजाना की तरह खुली. लेकिन, इन दोनों अस्पतालों के ओपीडी हॉल, रजिस्ट्रेशन काउंटर, खून की जांच व दवा काउंटरों पर सन्नाटा रहा. कमोबेश यही हाल पीएमसीएच, गार्डिनर रोड सहित अन्य छोटे सरकारी अस्पतालों में शुक्रवार को देखने को मिला. संबंधित अस्पतालों की इमरजेंसी में दबाव अधिक रहा. बाहर के मरीज भी ज्यादातर इमरजेंसी में इलाज कराने पहुंचे.

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