पटना : राज्य में शराबबंदी कानून के सफल क्रियान्वयन में बड़ी अड़चन पुलिस पदाधिकारियों का जनता से सीधे जुड़ाव नहीं होना है. शराब तस्करी की सूचना देने वाले की पहचान गोपनीय रहेगी, इस बात का भी भरोसा कम है.
छापेमारी से लेकर गिरफ्तारी और जब्ती की रूटीन कार्रवाई में भी उत्पाद और पुलिस पदाधिकारियों से चूक हो रही है. गुरुवार को मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग के प्रशिक्षण सह कार्यशाला में शराबबंदी कानून को लेकर राज्य भर के सहायक आयुक्त उत्पाद, अधीक्षक उत्पाद व निरीक्षक आदि के साथ मंथन में यह बातें निकलकर आयी हैं. एडीजी इओयू जितेंद्र सिंह गंगवार ने बतौर मुख्य अतिथि सलाह दी कि अधिकारी जनता से जुड़ें, यदि ऐसा नहीं करेंगे, तो शराब से जुड़ी सूचना भी नहीं मिलेगी. लोगों को विश्वास दिलाएं कि सूचना की गोपनीयता बनी रहेगी. अफसरों को अपनी यह मानसिकता बदलनी होगी कि जनता उनके पास आये. एडीजी ने 26 अवर निबंधक एवं निरीक्षक उत्पाद को नियुक्ति पत्र भी प्रदान किये.
आइजी मद्य निषेध अमृत राज ने सूचना संकलन, ऑपरेशन और अनुसंधान की बारीकियां बतायीं. उन्होंने कहा कि मद्य निषेध कानून के उल्लंघन के मामलों में पीड़ित (विक्टिम) नहीं होता. विक्टिमलेस क्राइम में एविडेंस से ही अपराधी की सजा तय होती है. इस लिए पूरे ऑपरेशन और अनुसंधान में छोटी-से-छोटी बात का ध्यान रखना जरूरी है.
कार्यशाला में विशेष लोक अभियोजक ने लंबित वादों के निस्तारण में आ रही समस्याओं पर प्रकाश डाला. उत्पाद आयुक्त सह महानिरीक्षक निबंधन बी कार्तिकेय धनजी ने धन्यवाद ज्ञापन किया. विभागीय अधिकारियों से अधिक-से-अधिक सीखने को कहा.
