नितिश
शादी के निबंधन को लेकर लोगों में बढ़ रही जागरूकता
पटना : न फेरे पड़े, न बैंड बजा और न बराती थे. लेकिन, फिर भी वर्ष 2019 में 964 जोड़े एक-दूसरे के कानूनन जीवन साथी बन गये. इन जोड़ों ने पटना जिला निबंधन कार्यालय में शादियां रचायी. लड़के व लड़की ने रजिस्ट्रार के समक्ष पति-पत्नी होने का शपथपत्र पढ़ा और एक दूजे के हो गये. इस दौरान दोनों पक्षों के केवल करीबी परिजन ही उपस्थित थे. इन शादियों का खर्च कुछ रुपयों में ही निबट गया. साथ ही लाखों खर्च करने की परेशानी से बच गये. हाल के दिनों में जिला निबंधन कार्यालय में शादी करने का प्रचलन बढ़ा है. लोग भारी-भरकम खर्च से बच कर निबंधन कार्यालय में शादी कर सर्टिफिकेट ले रहे हैं.
अगर किसी ने लाखों भी खर्च कर शादी की है, तो भी वे निबंधन कार्यालय में अपनी शादी का निबंधन करा रहे हैं. निबंधन कार्यालय में होने वाली शादी का आंकड़ा हर साल बढ़ रहा है, जिससे यह स्पष्ट है कि शादियों का निबंधन कराने के लिए लोग जागरूक हुए है. एक तरह से निबंधन करा कर शादियों को पूर्णरूपेण कानूनी मान्यता देने का प्रचलन बढ़ा है.
मार्च-अप्रैल व मई में होती हैं सबसे अधिक शादियां
पिछले कुछ सालों में हुए निबंधित शादियों का आंकड़ा
2013 764
2014 779
2015 865
2016 940
2017 903
2018 954
2019 964
पूरे साल में मार्च-अप्रैल व मई माह में सबसे अधिक शादियां होती है. बिहार में इस समय शादियों के लिए मौसम के हिसाब से अच्छा समय माना जाता है. हालांकि, कुछ वर्षों में जाड़े के समय दिसंबर व जनवरी में भी शादी करने का भी प्रचलन बढ़ा है. लेकिन, मार्च-अप्रैल व मई के आंकड़े से कम है.
अगर विदेश घूमने जाना चाहते हैं, तो शादी के निबंधन यानी मैरेज सर्टिफिकेट की जरूरत पड़ेगी. क्योंकि, इसी सर्टिफिकेट से स्पष्ट होगा कि आप दोनों पति-पत्नी है.
बैंक खाता खोलने के दौरान मैरिज सर्टिफिकेट के कागजात जमा करने से एक-दूसरे को कानूनी रूप से पति-पत्नी माना जायेगा. किसी प्रकार के शादी के विवाद होने पर उक्त सर्टिफिकेट से लाभ मिलेगा.
इंश्योरेंस पॉलिसी लेने में अक्सर लाेग अपनी पत्नी को नॉमिनी बनाते हैं. मैरेज सर्टिफिकेट के कारण पत्नी कानूनी रूप से हकदार मानी जायेंगी.
