पटना : स्वयं सहायता समूह को 7% ब्याज पर मिले कर्ज : सुशील मोदी

पटना : आम बजट को लेकर उपमुख्यमंत्री सह वित्त मंत्री सुशील कुमार मोदी ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को पत्र लिखा है. इसमें उन्होंने आम बजट में जीविका के तहत चलने वाली स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) की कर्ज सीमा को विभिन्न चरणों में एक से पांच लाख तक को बढ़ाकर तीन से 10 लाख […]

पटना : आम बजट को लेकर उपमुख्यमंत्री सह वित्त मंत्री सुशील कुमार मोदी ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को पत्र लिखा है. इसमें उन्होंने आम बजट में जीविका के तहत चलने वाली स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) की कर्ज सीमा को विभिन्न चरणों में एक से पांच लाख तक को बढ़ाकर तीन से 10 लाख तक करने की मांग की है.
साथ ही बैंकों के माध्यम से समूह के सभी सदस्यों को 10 हजार रुपये के ओवरड्राफ्ट की सुविधा देने को कहा. सभी जिलों में इस समूह के सदस्यों को छह से सात प्रतिशत ब्याज पर कर्ज देने और समय पर कर्ज की किस्त चुकाने वालों को तीन प्रतिशत ब्याज अनुदान देने का प्रावधान करने की मांग की है. इसके लिए रिवॉल्विंग फंड की सीमा को 15 हजार से बढ़ाकर 50 हजार करने और डिजिटल साक्षरता को बढ़ावा देने के लिए सभी समूह को कंप्यूटर, टैब व प्रिंटर समेत अन्य संसाधन उपलब्ध कराने की मांग की है.
इससे ‘डिजी ग्राम’ योजना भी सफल हो सकेगी. एसएचजी के वित्त पोषण को बढ़ाने के लिए ‘वुमेन इंपॉवरमेंट इंटरपेन्योरशिप फंड’ बनाने की जरूरत है, ताकि बैंकों को इसके माध्यम से अधिक- से- अधिक एसएचजी को कर्ज मिल सके. उपमुख्यमंत्री ने पत्र में कहा है कि एसएचजी को बिहार के 17 पिछड़े जिलों में तो छह से सात प्रतिशत ब्याज पर ऋण मिलता है, लेकिन शेष 21 जिलों में 10 से 12 प्रतिशत के सामान्य ब्याज दर पर कर्ज दिया जाता है.
सभी जिलों में छह से सात प्रतिशत ब्याज पर कर्ज देने की व्यवस्था के साथ ही समय पर कर्ज की किस्त का भुगतान करने वालों को तीन प्रतिशत ब्याज अनुदान देने की व्यवस्था बहाल करने की मांग की है.
उन्होंने कहा है कि बिहार में जीविका के तहत आठ लाख से ज्यादा एसएचजी के अंतर्गत एक करोड़ ग्रामीण महिलाएं जुड़ी हैं. इनकी कर्ज वापसी की दर 98.5 प्रतिशत है.
लालू पटना विवि को केंद्रीय दर्जा क्यों नहीं दिलवा पाये
पटना : डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी ने ट्वीट करके कहा है कि लालू प्रसाद ने 15 साल बिहार पर राज किया. वे पांच साल केंद्र की यूपीए सरकार में कद्दावर मंत्री भी रहे. इसके बावजूद पटना विश्वविद्यालय को केंद्रीय दर्जा क्यों नहीं दिलवा पाये. विरोधी दल के नेता को जो सवाल बहुत पहले अपने माता-पिता से पूछना चाहिए था, वह सवाल वे राज्य सरकार से क्यों पूछ रहे हैं. उन्होंने कहा कि लालू प्रसाद की सोच केवल चरवाहा विद्यालय, लाठी और लालटेन तक थी. राजद के जो लोग स्कूली तालीम भी पूरी न कर पाये, वे विश्वविद्यालय की बात कर रहे हैं.

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