पटना : उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने शनिवार को ट्वीट कर पड़ोसी देशों में अल्पसंख्यकों पर प्रताड़ना का मुद्दा उठाया है. उन्होंने लिखा है, ‘बिहार में जब हम गुरु नानक देव का 550वां और गुरु गोबिंद सिंह का 353 वां प्रकाशोत्सव मना रहे थे, तब पाकिस्तान में गुरु नानक देव के जन्मस्थान ननकाना साहिब में हिंसक भीड़ ने गुरुद्वारे पर हमला किया. साथ ही सिख महिला का धर्मांतरण पड़ोसी देश में धार्मिक असहिष्णुता और अत्याचार के क्रूर चेहरे को उजागर करता है. क्या ममता बनर्जी इस मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र से अपील करेंगी?
अपनी दूसरी ट्वीट में सुशील कुमार मोदी ने लिखा है,अब भारत में वे लोग मुंह दिखाने लायक नहीं रह गये हैं, जो धार्मिक उत्पीड़न के आधार पर हिंदू, सिख, ईसाई और पारसी समाज के शरणार्थियों को नागरिकता देने वाले कानून (सीएए) के विरोध में भ्रम फैलाकर पटना से जामिया तक हिंसा भड़काते रहे. राहुल गांधी, लालू प्रसाद और ममता बनर्जी बतायें कि उन्होंने ननकाना साहब पर हमले की घटना की निंदा क्यों नहीं की?
ये विरोधी पार्टियां नागरिकता कानून का समर्थन करने के लिए तीन पड़ोसी मुस्लिम देशों में और कितने हमलों का इंतजार करना चाहती हैं?’
बिहार में जनता झारखंड की गलती नहीं दोहरायेगी
अपने तीसरे ट्वीट में उपमुख्यमंत्री ने लिखा है, ‘झारखंड में जिस तरह से रघुबर सरकार के विकास कार्यों की अनदेखी करने के लिए आदिवासी-गैरआदिवासी का भेद डाला गया और दुष्प्रचार से बहुमत हासिल किया गया, उसका परिणाम सामने है.
हेमंत सोरेन सरकार ने एक सीट जीतने वाले राजद को न केवल मंत्री-पद दिया, बल्कि चारा घोटाला में सजायाफ्ता लालू प्रसाद के लिए जेल मैन्युअल की धज्जी उडायी जाने लगीं. वहां रोज लालू प्रसाद दरबार लगा रहे हैं. बिहार की जनता 2020 में ऐसी गलती नहीं दोहरायेगी कि जेल से सरकार चले और लालू-शहाबुद्दीन-राजबल्लभ यादव जैसे सजायाफ्ता लोग दरबार लगायें.
