विधानसभा चुनाव : सीटों के बंटवारे का गुणा-भाग शुरू

मिथिलेश 52 सीटों पर भाजपा-जदयू की बदल सकती है उम्मीदवारी पटना : अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में जाने से पहले एनडीए विधायकों का आपसी गुणा-भाग शुरू हो गया है. भाजपा-जदयू के बीच लोकसभा की तर्ज पर सीटों का बंटवारा हुआ, तो इस बार 124 मौजूदा सीटों में से 52 विधानसभा क्षेत्रों में उम्मीदवारी […]

मिथिलेश
52 सीटों पर भाजपा-जदयू की बदल सकती है उम्मीदवारी
पटना : अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में जाने से पहले एनडीए विधायकों का आपसी गुणा-भाग शुरू हो गया है. भाजपा-जदयू के बीच लोकसभा की तर्ज पर सीटों का बंटवारा हुआ, तो इस बार 124 मौजूदा सीटों में से 52 विधानसभा क्षेत्रों में उम्मीदवारी में फेरबदल हो सकता है.
विधानसभा चुनाव में अभी कम से कम 10 महीने का समय है. इसलिए अभी से गोटियां बिछनी शुरू हो गयी हैं. विधानसभा की 52 सीटें ऐसी हैं, जहां 2015 के विधानसभा चुनाव में पहले और दूसरे नंबर पर जदयू और भाजपा के उम्मीदवार रहे हैं. पिछली दफा विधानसभा चुनाव में जदयू को 71 सीटें मिली थीं.
इनमें 28 सीटों पर दूसरे नंबर पर भाजपा रही. इसी प्रकार भाजपा 53 सीटों पर पहले नंबर पर रही जिनमें 24 सीटों पर सीधा मुकाबला जदयू से रहा. 10 महीने बाद होने वाले विधानसभा चुनाव में जदयू,भाजपा और लोजपा का गठबंधन साथ रहा तो सीटों के बंटवारे में कई सीटों के उम्मीदवार बदल सकते हैं. कुछ सीटों पर पिछले चुनाव में दूसरे नंबर पर रह गये उम्मीदवारों का पत्ता भी कट सकता है. हालांकि, गठबंधन में मौजूदा सीटों की कुरबानी होती रही है. पर, दोनों ही दलों में आधिकारिक तौर पर इस पर चुप्पी है.
जानकार बताते हैं कि जदयू और भाजपा की कुछ सीटें ऐसी हैं, जिन्हें दोनों ही दल आखिरी दम तक अपने हिस्से में रखना चाहेंगे. उदाहरण के तौर पर पटना की दीघा सीट भी है. 2009 में परिसीमन के बाद पहली बार हुए 2010 के विधानसभा चुनाव में जदयू को दीघा विधानसभा की सीट मिली थी. यहां से पूनम देवी जदयू के टिकट पर विजयी हुई. 2015 में इस सीट पर भाजपा और जदयू का सीधा मुकाबला हुआ, जिसमें जीत भाजपा को मिली. इस चुनाव में जदयू-राजद और कांग्रेस का महागठबंधन था. भाजपा के साथ लोजपा और रालोसपा व हम पार्टियां थीं.
इस बार के चुनाव में तालमेल किस करवट बैठेगा, यह फैसला दिलचस्प होगा. इसी प्रकार गोपालगंज जिले के बैकुंठपुर विधानसभा की सीट पर भाजपा का कब्जा है. पिछली दफा यहां भाजपा और जदयू में कांटे की टक्कर रही है. यहां से पहले जदयू के मंजीत सिंह विधायक रहे, अब भाजपा के मिथिलेश तिवारी विधायक हैं.
पूर्वी और पश्चिमी चंपारण जिले की कुल 21 विधानसभा सीटों में जदयू के केवल एक सिकटा में खुर्शीद फिरोज अहमद विधायक हैं. जबकि, दोनों जिलों की 12 सीटों पर भाजपा के विधायक हैं. जदयू बगहा, नौतन,चनपटिया, कल्याणपुर, पिपरा और मधुबन समेत छह सीटों पर दूसरे नंबर पर रहा है.दोनों जिले की छह सीटों पर भाजपा दूसरे नंबर पर रही है. सीटाें के बंटवारे में दोनों ही दलों की भागीदारी सुनिश्चित है. ऐसे में दोनों ही दलों की उम्मीदवारी भी बदल सकती है.
24 सीटें जहां भाजपा पहले और जदयू दूसरे नंबर पर रही है
बगहा, चनपटिया, कल्याणपुर, पिपरा, मधुबन, सिकटी, कटिहार, जाले, कुढ़नी, मुजफ्फरपुर, बैकुंठपु, सीवान, अमनौर, लखीसराय, बिहारशरीफ, बाढ़, दीघा, भभुआ, गोह, गुरुआ, हिसुआ, वारसलीगंज और झाझा.
28 सीटें जिन पर जदयू पहले नंबर पर और भाजपा दूसरे नंबर पर रही है
सिकटा, फुलपरास, लाकहा, निर्मली, सुपौल, रानीगंज, जोकीहाट, रूपौली, बिहारीगंज, बेनीपुर,जाले,जीरादेई,दरौंदा, महाराजगंज, एकमा, महनार, मोरवा, सरायरंजन, मटिहानी, परवत्ता, गोपालपुर, अमरपुर, बेलहर, राजगीर, इसलामपुर, नालंदा, राजपुर और नवीनगर.
बंटवारे का अलग फार्मूला करना होगा तैयार
राज्य के कई जिलों में चंपारण जैसी स्थिति रही है. मिथिलांचल की सीटों के बंटवारे में भी पेच फंसने की संभावना है. मधुबनी जिले की 10 विधानसभा सीटों में भाजपा का कब्जा मात्र एक सीट पर है. जदयू और राजद चार पर तथा एक बेनीपट्टी की सीट कांग्रेस की झोली में है. दरभंगा जिले की 11 सीटों में पांच पर राजद, चार पर जदयू और दो सीटें भाजपा के कब्जे में है.2010 के विधानसभा चुनाव में जदयू और भाजपा के बीच तालमेल था.
जदयू 141 सीटों पर चुनाव लड़ा और उसे 115 सीटों पर जीत हासिल हुई. भाजपा को मिली 102 सीटों में 91 सीटों पर उसके उम्मीदवार विजयी हुए. इस बार एनडीए में लोजपा भी शामिल है. ऐसी स्थिति में चौथी पार्टी एनडीए में शामिल नहीं हुई तो भी सीटों के बंटवारे का अलग फार्मूला तैयार करना होगा.

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