पटना/रांची : रांची की इंजीनियरिंग छात्रा के साथ दुष्कर्म और हत्या के मामले में शुक्रवार को रांची सीबीआइ के विशेष न्यायाधीश एके मिश्र की अदालत ने आरोपित राहुल कुमार को दोषी करार दिया. राहुल पर पटना के महिला थाना समेत कंकड़बाग व बेऊर थाने में भी मामला दर्ज है. अदालत ने सजा के बिंदु पर सुनवाई के लिए 21 दिसंबर की तिथि निर्धारित की है. उसे घर में घुस कर दुष्कर्म करने, हत्या करने और सबूत मिटाने के तहत दोषी पाया गया. राहुल कुमार नालंदा जिले के एकंगरसराय थाने के धुरगांव का रहनेवाला है.
दुष्कर्म-चोरी सहित 10 प्राथमिकियां दर्ज : रांची में घटना को अंजाम देने से पहले से राहुल के खिलाफ बिहार और यूपी में दुष्कर्म, चोरी सहित अन्य आरोपों में 10 प्राथमिकी दर्ज थी. राहुल कुमार आपराधिक गतिविधियों को अंजाम देने और खुद को बचाये रखने के लिए राहुल कुमार, राहुल राज, राज श्रीवास्तव, रॉकी राज, आर्यन, अंकित के अलग-अलग नामों से जाना जाता था.
महिला थाने में पॉक्सो एक्ट का केस : राहुल पर पटना के महिला थाना में 30 अप्रैल 2013 को केस दर्ज हुआ था. मामले में 14 वर्षीय युवती ने दुष्कर्म के बाद अश्लील तस्वीर लेने का आरोप लगाया था. आरोपी ने यहां राज श्रीवास्तव के नाम से अपराध किया था. वहीं, कंकड़बाग थाना में दर्ज दो अलग-अलग मामले में लैपटॉप और 14 हजार रुपये की चोरी तथा चोरी का सामान रखने का आरोप है. बेऊर थाने में दर्ज एक मामले में जेल में मोबाइल रखने का आरोप है. राहुल पर नालंदा के एकंगसराय थाने में दर्ज मामले में पुलिस हिरासत से भागने का आरोप है.
ऐसे राहुल तक पहुंची सीबीआइ
15 दिसंबर 2016 की रात रामटहल चौधरी इंजीनियरिंग कॉलेज की छात्रा की दुष्कर्म के बाद हत्या कर दी गयी थी. इस मामले में 16 दिसंबर को छात्रा के पिता ने सदर थाने में प्राथमिकी दर्ज करायी थी. फॉरेंसिक लैब की जांच में सीबीआइ इस नतीजे पर पहुंची कि दुष्कर्म और हत्या की घटना को एक ही व्यक्ति ने अंजाम दिया है. इसके बाद सीबीआइ को जानकारी मिली कि पटना महिला थाना में भी राहुल के नाम पर दुष्कर्म का एक मामला दर्ज है. पटना पुलिस से राहुल का पता जुटाने के बाद सीबीआइ उसके माता-पिता के पास पहुंची.
माता-पिता के खून का नमूना लेकर दिल्ली स्थित फॉरेंसिक लैब में जांच के लिए भेजा. डीएनए जांच में इस बात की पुष्टि हुई कि नालंदा निवासी उमेश प्रसाद और निर्मला देवी ही उस अपराधी के माता-पिता हैं, जिसने इंजीनियरिंग की छात्रा की दुष्कर्म के बाद हत्या की है.
इस बीच सीबीआइ को यह भी पता चला कि राहुल को लखनऊ पुलिस ने 11 अप्रैल 2019 को चोरी की नीयत से घर में घुसने के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया. सीबीआइ ने कोर्ट से अनुमति लेने के बाद लखनऊ जेल में जाकर राहुल के खून का नमूना लेकर फॉरेंसिक लैब में भेजा. जांच में इस बात की पुष्टि हुई कि दुष्कर्म और हत्या को अंजाम देनेवाला अपराधी राहुल ही है. स्पीडी ट्रायल के दौरान सीबीआइ की ओर से सिर्फ 16 दिनों में 30 गवाहों का बयान दर्ज कराया. हत्या और दुष्कर्म के इस मामले में अभियुक्त की ओर से कोई गवाह नहीं पेश किया गया.
