1064 में आठ सौ थानों में बना है व्हाट्सएप ग्रुप, पुलिस से लेकर हर वर्ग के लोग हैं जुड़े
पटना : राज्य में अपराध पर नकेल कसने, अपराधियों की गिरफ्तारी में मदद करने के साथ ही आम लोगों के साथ सूचनाएं आदान-प्रदान करने के लिए पुलिस महकमा साइबर स्पेस का उपयोग करने लगा है. राज्य के 1064 थानों में 800 से ज्यादा थानों में व्हाट्सएप पर ‘साइबर सेनानी’नाम से ग्रुप बन गया है. जल्द ही इसका गठन सभी बचे हुए थानों में करने का निर्देश पुलिस मुख्यालय की तरफ से दिया गया है.
इस ग्रुप के संचालन की जिम्मेदारी या एडमिन संबंधित थाने के प्रभारी या इंस्पेक्टर को बनाया गया है. इस ग्रुप में कई आम लोगों के अलावा बुद्धिजीवी, डॉक्टर, इंजीनियर, वकील, प्रोफेसर व पदाधिकारी समेत अन्य सभी वर्ग के लोगों को जोड़ा गया है. इसके माध्यम से कई पुराने मामले भी हल किये
गये हैं और कई लोगों को वक्त पर सहायता भी मिली है. इस ग्रुप में पुलिस के कुछ अधिकारी भी शामिल रहते हैं. ऐसे में इस पर की गयी शिकायत को किसी स्तर पर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है. कई संवेदनशील मौकों पर भी थाना स्तर पर पुलिस इस ग्रुप का उपयोग कर अफवाह फैलाने या गलत बातों के प्रसार को भी रोकने में मदद लेती है.
कुछ खास मामले, जो किये गये हल
तीन साल पहले औरंगाबाद जिले के गोह बस स्टैंड से 17 वर्षीया लड़की का अपहरण हो जाता है. इसके बाद उसे दलालों ने आगरा ले जाकर 30 हजार में बेच दिया गया. फिर उसे दूसरी बार इसी शहर के दूसरे व्यक्ति से बेचा गया. तीसरी बार 40 हजार लेकर उसकी जबरन शादी मध्यप्रदेश के मुरैना में रहने वाले राघवेंद्र शर्मा से करवा दी गयी.
वहां उसका नाम और पता बदलकर आधार बना दिया गया और उसे जबरदस्ती वहां रखा जाने लगा. उस लड़की ने किसी तरह अपना वीडियो बनाकर यू-ट्यूब पर अपलोड कर दिया, जिसे उसके गांव के एक लड़के ने पहले देखा और इसे संबंधित थाने के साइबर सेनानी ग्रुप में डाल दिया.
इसके बाद यह मामला मुख्यालय स्थित साइबर सेल में पहुंचा. यहां से एक विशेष टीम का गठन करके लड़की को मुरैना जाकर छुड़ाकर लाया गया और आरोपित राघवेंद्र शर्मा समेत अन्य की गिरफ्तारी भी की गयी. अन्य आरोपितों बबलू, दिनेश और उर्मिला देवी की तलाश की जा रही है. पुलिस तक यह मामला साइबर सेनानी ग्रुप के माध्यम से ही पहुंचा और लड़की को तीन साल बाद वापस घर पहुंचाया जा सका. गोह थाना में मामला दर्ज भी किया गया है.
पश्चिम चंपारण में रहने वाले एक रिटायर्ड सरकारी कर्मी के बैंक एकाउंट से साइबर ठगों ने डेढ़ लाख रुपये निकाल लिये. इस मामले की जानकारी कुछ समय बाद सामने आने पर किसी व्यक्ति ने इसे ग्रुप में डाला. इसके बाद पुलिस और ग्रुप के ही कुछ लोगों ने पहले उस कर्मी का बैंक एकाउंट ब्लॉक करवाया. फिर इस मामले में छानबीन शुरू की, तो दो आरोपित भी पकड़े गये और आधे रुपये भी रिकवर हो गये. इस तरह के कई उदाहरण हैं.
सभी पुलिस थाने में इसका गठन अनिवार्य रूप से करने के निर्देश दिये गये हैं. पुराने और कई उलझे मामलों को सुलझाने में इस साइबर तकनीक की मदद ली जा रही है. इससे आम लोगों तक अपनी बात पुलिस तक पहुंचाने में सुविधा मिल रही है.
जितेंद्र सिंह गंगवार, एडीजी इओयू
