पटना : डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी ने ट्वीट कर कहा है कि लालू प्रसाद द्वेषपूर्ण जातीय राजनीति से समाज को बांटकर बिहार पर 20 साल राज करने के दावे करते फिरते थे. उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा ने ‘सबका साथ, सबका विकास’ करने की नीति से ऐसा सबक सिखाया कि उनकी पार्टी इस बार लोकसभा का मुंह नहीं देख सकी.
वर्ष 2020 के विधानसभा चुनाव में भी एनडीए संसदीय चुनाव की सफलता दोहरायेगा. उन्होंने कहा कि राजद की मुश्किल यह है कि उसका एक गुट वजूद बचाने के लिए नीतीश कुमार का नेतृत्व स्वीकार करने को लालायित है, तो दूसरे को परिवारवादी राजनीति से बचाने के लिए मुख्यमंत्री को दिन-रात कोसना जरूरी लगता है. जिस दल के पास स्पष्ट नीति और साफ नीयत नहीं हो, वह अंतरद्वंद्व में जीता है और सत्ता के लिए तंत्र से तिकड़म तक- सब कुछ आजमाते हैं.
डिप्टी सीएम ने रालोपसा प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा का बिना नाम लिये कटाक्ष करते हुए ट्वीट किया है कि पांच साल केंद्र में मंत्री रहने के बावजूद वे बिहार में एक भी केंद्रीय विद्यालय नहीं खोलवा सके. मंत्री रहते काम करने के बजाय शिक्षा पर धरना-प्रदर्शन की जो तमाशा-राजनीति उन्होंने शुरू की, उसे ‘आमरण अनशन’ के क्लाइमेक्स पर पहुंचाया. अनशन तोड़ने के लिए उन साथियों के आश्वासन पर भरोसा कर लिया, जो 15 साल में बिहार को केंद्रीय विद्यालय नहीं, केवल चरवाहा विद्यालय दे पाये. शब्दों की समझ यह कि वे अपने अनिश्चितकालीन अनशन को ‘आमरण अनशन’ बताते रहे.
