पटना : पटना जिले के शहरी क्षेत्र के 36 थानों को कंप्यूटराइज किये जाने की प्रक्रिया शुरू हो गयी है. इसके तहत पहले चरण में सीसीटीवी कैमरे व कंप्यूटर को इंस्टाॅल किया जा रहा है. हालांकि, प्रक्रिया काफी धीमी है. क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग सिस्टम (सीसीटीएनएस) प्रोजेक्ट के तहत पूरे बिहार के 894 थानों की व्यवस्था कंप्यूटराइज करनी थी.
पटना के 36 थानों का कंप्यूटरीकरण शुरू
पटना : पटना जिले के शहरी क्षेत्र के 36 थानों को कंप्यूटराइज किये जाने की प्रक्रिया शुरू हो गयी है. इसके तहत पहले चरण में सीसीटीवी कैमरे व कंप्यूटर को इंस्टाॅल किया जा रहा है. हालांकि, प्रक्रिया काफी धीमी है. क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग सिस्टम (सीसीटीएनएस) प्रोजेक्ट के तहत पूरे बिहार के 894 थानों की […]

इसके लिए संबंधित कंपनी टीसीएस द्वारा अक्तूबर तक काम पूरा करने की जानकारी दी गयी थी. लेकिन, अक्तूबर में ही काम शुरू हुआ और अब इसे पूरा होने में तीन-चार माह अवश्य ही लग जायेंगे. फिलहाल सभी थानों में मात्र एक या दो ही कंप्यूटर हैं, जिनका उपयोग किसी प्रकार का पत्र निकालने, डाटा निकालने आदि में किया जाता है.
पुलिस व आम लोगों को होगा फायदा
सीसीटीएनएस प्रोजेक्ट के तहत अगर थानों को कंप्यूटराइज करने का काम पूरा हो गया, तो इससे आम लोगों के साथ ही पुलिस को भी फायदा होगा. आम लोग थानों में दर्ज एफआइआर, डायरी, चार्जशीट को ऑनलाइन देख सकेंगे. इसके साथ ही ऑनलाइन एफआइआर भी कर सकते हैं. पुलिस के लिए भी काम आसान हो जायेगा, क्योंकि अपराधियों का फिंगर प्रिंट डाटाबेस, गुंडा रजिस्टर, गिरोह की जानकारी आदि ऑनलाइन देखने की व्यवस्था रहेगी.
पटना पुलिस भी अपनी टीम कर रही तैयार
पटना पुलिस भी अपने कंप्यूटर प्रोफेशनल को तैयार कर रही है. इसके लिए सब इंस्पेक्टर, एएसआइ, कॉन्स्टेबल आदि को कंप्यूटर का प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि वे खुद भी प्रोजेक्ट के बनाये गये सॉफ्टवेयर में अपने-अपने केस से संबंधित जानकारी को अंकित कर सकें और ऑनलाइन जानकारी ले सकें. इसके लिए एसएसपी कार्यालय में बने एक हॉल में प्रतिदिन प्रशिक्षण दिया जाता है.
प्रोजेक्ट के तहत क्या-क्या किया जाना है
कंप्यूटर में एक विशेष सॉफ्टवेयर को इंस्टॉल किया जायेगा, जिसमें थानों में होने वाली एफआइआर, सुपरविजन रिपोर्ट, चार्जशीट, अपराधियों का डाटाबेस डाला जायेगा.
काम पूरा होने के बाद हर थानों को एनसीआरबी, एससीआरबी, पुलिस मुख्यालय व अन्य राज्यों के थानों से जोड़ दिया जायेगा.हर थाने में तीन कंप्यूटरों की व्यवस्था की जायेगी.
इंटरनेट की व्यवस्था होगी.
तीन डाटा इंट्री ऑपरेटर की व्यवस्था की जायेगी, जो एफआइआर, सुपरविजन रिपोर्ट, चार्जशीट आदि की इंट्री करेंगे, ताकि ऑनलाइन देखा जा सके.