विज्ञान के बदलते सिद्धांतों में वशिष्ठ बाबू का गणितीय सोच

राजदेव पांडेय महान गणितज्ञ डॉ वशिष्ठ नारायण सिंह की मौत ने सभी को दुखी कर दिया है. जो उन्हें व्यक्तिगत रूप से जानते थे वे भी और जिन्होंने उनके बारे में सुन रखा था भी उदास हैं. सभी उनसे जुड़ी यादों को संजो रहे हैं. उनसे जुड़े किस्सों को बयां कर रहे हैं. दोस्त, रिश्तेदार, […]

राजदेव पांडेय
महान गणितज्ञ डॉ वशिष्ठ नारायण सिंह की मौत ने सभी को दुखी कर दिया है. जो उन्हें व्यक्तिगत रूप से जानते थे वे भी और जिन्होंने उनके बारे में सुन रखा था भी उदास हैं. सभी उनसे जुड़ी यादों को संजो रहे हैं. उनसे जुड़े किस्सों को बयां कर रहे हैं. दोस्त, रिश्तेदार, परिचित और अन्य लोग भी वशिष्ठ बाबू की खूबियों और उनकी काबिलियत की चर्चा में लगे हैं. वशिष्ठ बाबू भले ही दुनिया से चले गये हैं मगर उनकी स्मृतियां सदा दिलों में बसी रहेंगी.
पटना : वंगत डा वशिष्ठ नारायण सिंह ने भौतिक विज्ञान की सबसे दुरूह शाखा क्वांटम मेकेनिक्स में योगदान देने के लिए हिल्बर्ट स्पेस नाम के गणितीय आधार का इस्तेमाल किया था. हिल्बर्ट स्पेस गणित में फंक्सनल मैथ की शाखा है. यह सबसे कठिन संकल्पना है. गणित में उनकी पीएचडी रिसर्च पेपर”रिप्रोड्यूजिंग कर्नल्स एंड ऑपरेटर्स विद साइक्लिक वेक्टर ” नाम से 1974 में पैसिफिक जर्नल ऑफ मैथमैटिक्स में 18 पेजों में प्रकाशित हुआ. इसमें उन्होंने गणितीय आधार पर विज्ञान के कुछ रहस्यों पर अपने मत दिये.
उन्होंने अपने रिसर्च पेपर में संकेत दिये थे कि दुनिया में कुछ भी अनंत नहीं है. उसे गणितीय संकल्पना के आधार पर समझा जा सकता है. उस समय उनकी ये मौलिक सोच थी. वर्तमान दुनिया के तमाम भौतिकी विज्ञानी उन्हीं की इस अवधारणा को आगे बढ़ाने में लगे हैं.
जानकारों का कहना है कि आगामी दस सालों में विज्ञान की कुछ खास अवधारणाओं में बदलाव होने जा रहे हैं, इनमें वे अवधारणाएं भी शामिल हैं, जिन पर उन्होंने अपने रिसर्च पेपर में अभिमत दिया था. जाहिर है कि विज्ञान की अवधारणाओं में होने वाले बदलाव की नींव में दुनिया के चुनिंदा गणितज्ञों में भारत के ‘लाल’ दिवंगत डॉ वशिष्ठ नारायण सिंह भी शामिल हैं. उन्होंने अपने रिसर्च पेपर में थ्री डायमेंशन (लंबाई,चौड़ाई और ऊंचाई ) से परे कुछ और आयामों की संभावना जतायी थी. उन्होंने अपने रिसर्च में क्वांटम मैकेनिक्स पर अहम काम किया था.
छोटे कणों कणों के गुण धर्म समझने के लिए क्वांटम शब्द का उपयोग किया जाता है. दिवंगत सिंह ने रिसर्च पेपर में कणों के अलग-अलग स्वभाव की वजह के बारे में बताने का प्रयास किया. कणों के अलग अलग स्वभाव क्यों हो जाते हैं?
इस बारे में अभी भी दुनिया के वैज्ञानिकों में कोई एक राय नहीं बन सकी है. पचास साल पहले गणितीय आधार पर क्वांटम मैकेनिक्स (चक्रीय वृद्धि या कणों में वृद्धि का स्वभाव) पर इतनी गहराई से सोच रखने वाले चंद वैज्ञानिकों में से वे एक थे. दरअसल क्वांटम मैकेनिक्स कणों की प्रकृति को समझने काजरिया है. उनका रिसर्च इतना बहुआयामी था कि उसमें ऑप्टीमाइजेशन पर भी फोकस किया. बताया कि असीमित को सीमित और असंख्य को बेहद कम किया जा सकता है. इसी थ्योरी के आधार पर दुनिया का औद्योगिक परिदृश्य बदल रहा है. इसमें किसी भी यूनिट के उत्पादन, रोजगार और निवेश को आकलन के जरिये किफायती बनाया जा सकता है. कुल मिला कर उनकी सोच में गणित के जरिये अर्थव्यवस्था को सुव्यवस्थित करना भी शामिल था.
(कैलीफोर्निया विश्वविद्यालय( बर्कले) में प्रस्तुत शोधपत्र बिहार के जानेमाने गणित के जानकार प्रोफेसर (डाॅ) के सी सिन्हा और भौतिक विज्ञान के प्रोफेसर (डॉ ) अमरेंद्र नारायण से की गयी बातचीत के आधार पर)
प्रभात खबर के नियमित पाठक थे
वशिष्ठ नारायण सिंह
महान गणतिज्ञ डॉ वशिष्ठ नारायण
सिंह प्रभात खबर दैनिक अखबार के नियमित पाठक थे. अखबार में पूर्व में छपी अपनी खबर की कटिंग को फोटो फ्रेम में मढ़वाकर उसे दीवार पर टंगवा दिया था.
बर्कले यूनिवर्सिटी में कहा जाता था
सबसे बड़ा जीनियस
बर्कले यूनिवर्सिटी में उन्हें जीनियसों का जीनियस कहा जाता था. 1971 में श्री सिंह वापस भारत आ गये. 1972-73 में आइआइटी कानपुर में प्राध्यापक के पद पर रहने के बाद टाटा इंस्टीट्यूट में उच्च पदों पर आसीन रहे.

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By Prabhat khabar digital desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >