पटना की सड़कों पर दौड़ रहे 15 वर्ष पुराने 25000 व्यावसायिक वाहन

जर्जर होने के बावजूद अब भी सड़कों पर दौड़ रहे सभी प्रकार के वाहन बढ़ा रहे हैं प्रदूषण की मात्रा पटना : पटना की सड़कों पर 15 वर्ष पुराने 25 हजार व्यावसायिक वाहन दौड़ रहे हैं. पटना जिला परिवहन कार्यालय में वर्तमान में 2.5 लाख व्यावसायिक वाहन पंजीकृत हैं. इनमें 50 हजार व्यावसायिक वाहन 15 […]

जर्जर होने के बावजूद अब भी सड़कों पर दौड़ रहे सभी प्रकार के वाहन बढ़ा रहे हैं प्रदूषण की मात्रा
पटना : पटना की सड़कों पर 15 वर्ष पुराने 25 हजार व्यावसायिक वाहन दौड़ रहे हैं. पटना जिला परिवहन कार्यालय में वर्तमान में 2.5 लाख व्यावसायिक वाहन पंजीकृत हैं. इनमें 50 हजार व्यावसायिक वाहन 15 वर्ष से अधिक पुराने हैं.
डीटीओ अजय कुमार ठाकुर ने बताया कि इनमें से 50 फीसदी व्यावसायिक वाहन बेहद पुराने होने के कारण अब चलने लायक नहीं रहे. लेकिन 25 हजार व्यावसायिक वाहन जर्जर होने के बावजूद अभी भी सड़कों पर निकल रहे हैं. सोमवार को सीएम के द्वारा ऐसे वाहनों के परिचालन पर रोक का निर्देश दिया गया है.
डीटीओ ने बताया कि निर्देश की कॉपी परिवहन विभाग को मिलने और उसके द्वारा अधिसूचना जारी होने के साथ ही इन वाहनों के परिचालन पर रोक लग जायेगा. अधिसूचना में उन वाहन सीरीजों का स्पष्ट उल्लेख होगा, जिनका परिचालन शहर में रोका जायेगा.
पुराने वाहनों में ऑटो रिक्शा से भारी ट्रक तक शामिल : सड़कों पर दौड़ रहे 15 वर्ष पुराने व्यावसायिक वाहनों में ऑटो रिक्शा से भारी ट्रक तक शामिल हैं. पटना शहरी क्षेत्र में इस समय 35 हजार ऑटो रिक्शा पंजीकृत हैं.
इनमें 15 हजार ऑटो रिक्शा 15 वर्ष से अधिक पुराने हैं. इनमें से पांच हजार चलने लायक नहीं रहे जबकि 10 हजार आॅटो रिक्शा पुराने और जर्जर होने के बावजूद भी सड़कों पर दौड़ रहे हैं. ये तय मानक से कई गुणा अधिक काला धुआं छोड़ते हैं. छह चक्का वाले ट्रकों में 20 से 30 फीसदी 15 साल से अधिक पुराने हैं क्योंकि पिछले दिनों छोटे ट्रकों की बजाय बड़े ट्रकों (आठ से 14 चक्का) को खरीदने का चलन बढ़ा है.
स्कूली वैन व बसों के रूप भी पुराने वाहन हो रहे इस्तेमाल : 15 वर्ष पुराने वाहनों में बड़़ी संख्या स्कूली बच्चों को ले जाने वाले वैन की भी है. इनके द्वारा छोड़े जाने वाले गहरे काले धुएं का सीधा असर बच्चों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है. स्कूल बस के रूप में इस्तेमाल होने वाले कई मिनी और बड़े बस भी 15 साल से अधिक पुराने हैं. जर्जर स्थिति के कारण जब वे लंबे फेरे लगाने में सक्षम नहीं रहे तो उन्हें स्कूली बच्चों को ले जाने में इस्तेमाल किया जाने लगा.
टैक्सी के रूप में चल रही है पुरानी सेकेंड हैंड कार
टैक्सी के रूप में चल रहे पुराने कारों में भी ज्यादातर 15 वर्ष से लंबा समय पूरा कर चुके हैं. सेकेंड हैंड गाड़ी के रूप में कम कीमत में खरीदकर और हल्के फुल्के मरम्मत के द्वारा उन्हें चलने लायक बना दिया गया है. लेकिन उनका उत्सर्जन स्तर सामान्य से काफी अधिक बना हुआ है जिससे सड़कों पर प्रदूषण फैल रहा है और आने जाने वाले लोगों को परेशानी हो रही है.
365 में 60 सिटीराइड बसें 15 साल पुरानी
365 में 60 सिटीराइड बसें 15 साल से अधिक पुरानी हो गयी हैं. इनके द्वारा फेंके जानेवाले काले धुएं से न केवल सड़क पर चलने वाले लोगों को परेशानी हो रही है बल्कि जर्जर स्थिति के कारण इन बसों में बैठने वालों को भी परेशानी है. सीट और उसके आसपास निकले कांटी से कपड़े फटने का भी खतरा बना रहता है. केवल प्राइवेट सिटीराइड बसें ही नहीं बल्कि राज्य पथ परिवहन निगम की कुछ पुरानी बसें भी शहर के पर्यावरण के लिए एक बड़ी समस्या बने हुए हैं.
प्रदूषण फैलाने वाले 245 वाहनों की हुई जांच आठ जब्त और 22 पर लगा जुर्माना
पाॅल्यूशन वैन से हो रही जांच, एक सप्ताह तक चलेगा विशेष अभियान
पटना : बढ़ते प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए राजधानी में परिवहन विभाग द्वारा मंगलवार से विशेष वाहन जांच अभियान शुरू किया गया. सुबह दस बजे से लेकर देर शाम तक चले अभियान के दौरान कुल 245 वाहनों की जांच की गयी, जिसमें 22 से जुर्माना वसूला गया और 8 वाहनों को जब्त किया गया.
परिवहन सचिव संजय कुमार अग्रवाल ने बताया कि वायु प्रदूषण के स्तर को कम करने के लिए विशेष जांच अभियान एक सप्ताह तक लगातार चलाया जायेगा. आॅटो रिक्शा, सिटी बसों में किरासन तेल के उपयोग की भी शिकायत मिल रही है. ऐसे वाहनों की भी मोबाइल पाॅल्यूशन वैन से आॅन स्पाॅट जांच की जा रही है.
चार टीम की गयी है गठित : राजधानी में विशेष जांच अभियान चलाने के लिए अलग-अलग चार टीम गठित की गयी है. हर टीम में एमवीआइ, इएसआइ, रोड सेफ्टी की टीम और यातायात पुलिस रहेगी. टीम के साथ मोबाइल पाॅल्यूशन जांच वैन को भी रखा गया है. हर दिन अलग-अलग जगहों पर जांच टीम रहेगी.
नाराज हुए बस यात्री : बिहार म्यूजियम के सामने एक सिटी बस को जांच के लिए 15-20 मिनट तक रोक दिया गया. इससे उसमें बैठे यात्री नाराज हो गये. जांच के दौरान गाड़ी के कागजात फेल पाये गये, लेकिन यात्रियों की नाराजगी को देखते हुए नोटिस देकर बस को जाने दिया गया.
प्रदूषण फैलाते वाहनों की आप भी वीडियो बनाकर भेजें
परिवहन सचिव ने बताया कि प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर कार्रवाई के लिए आम लोग भी संबंधित वाहन का वीडियो बना कर जिला परिवहन पदाधिकारी, पटना के मोबाइल नंबर 6202751158 या एमवीआइ के मोबाइल नंबर 9955332202 पर वाट्सएप कर सकते हैं. साथ ही जिन वाहनों का नंबर प्लेट नहीं है, उसकी भी वीडियो बना कर भेज सकते हैं. ऐसे वाहन मालिकों पर कार्रवाई की जायेगी.
जांच के लिए रोकी गाड़ी तो धक्के लगा कर करना पड़ा स्टार्ट
जांच के दौरान बिहार म्यूजियम के सामने एक सिटी बस को रोकना परिवहन कर्मियों को बहुत महंगा पड़ा. प्रदूषण जांच में बस के फेल हो जाने और उसके पास किसी कागज के नहीं होने पर जांच अधिकारियों ने बुधवार को सारे कागज दिखाने का नोटिस देकर बस को जाने की इजाजत दे दी. लेकिन जब बस को ड्राइवर ने स्टार्ट करने का प्रयास किया तो उसका सेल्फ काम नहीं किया. मजबूरन गाड़ी को धक्का लगा कर एमवीआइ और परिवहन कर्मियों को स्टार्ट करना पड़ा. एक स्कूल बस की भी यही स्थिति दिखी. जांच अधिकारियों ने बस को रुकवाने के बाद जब उसमें छोटे छोटे बच्चों को बैठे देखा तो बस को जाने की इजाजत दे दी. लेकिन उसका भी इंजन स्टार्ट नहीं हुआ और उसे धक्का लगा कर स्टार्ट करना पड़ा.
जांच के दौरान इनपर होगा फोकस
प्रदूषण फैलाने वाली सिटी बस
केरोसीन मिक्स कर चलने वाले आॅटो
व्यावसायिक वाहन
बिना हेलमेट और सीट बेल्ट
बिना नंबर की गाड़ी
जुगाड़ वाहन
पटना : सड़कों पर पानी का छिड़काव खानापूर्ति, कार्रवाई सुस्त
पटना : राजधानी में प्रदूषण की समस्या गंभीर बन गयी है. प्रदूषण की बढ़ते स्तर पर विराम लगाने को लेकर संबंधित विभाग को सख्त निर्देश दिया गया है. यह निर्देश सिर्फ इस वर्ष ही नहीं दिया गया है. बल्कि पिछले वर्ष भी मुख्य सचिव के स्तर से नगर निगम को सख्त निर्देश दिया गया.
मुख्य सचिव के निर्देश के बाद कुछ दिनों तक सख्ती से अभियान चलाया गया और फिर निगम अधिकारी भूल गये. अब मुख्यमंत्री की ओर से प्रदूषण रोकथाम को लेकर सख्त निर्देश दिया गया है. इस निर्देश के बाद सड़कों पर पानी छिड़काव शुरू किया गया, जो सिर्फ खानापूर्ति है. वहीं, बिल्डिंग मेटेरियल, निर्माणाधीन बिल्डिंग को ढकने, कचरा जलाने, निर्माणाधीन सड़कों पर पानी छिड़कने और कचरे को ढक कर ले जाने से संबंधित निर्देश दिया गया है. लेकिन, पालन कुछ नहीं हो रहा. पेश है रिपोर्ट :
राजधानी की हवा को दूषित करने में बिल्डिंग मेटेरियल की महत्वपूर्ण भूमिका है. सड़कों पर बिल्डिंग मेटेरियल रखने वाले दुकानदार या आमलोगों पर सख्त कार्रवाई व जुर्माना वसूल करना है. लेकिन, निगम की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गयी है. स्थिति यह है कि गांधी मैदान के जेपी गोलंबर के समीप सड़क के दोनों ओर बालू व मिट्टी की ढेर पड़े है. वहीं, मैनपुरा, दीघा रोड, सीपारा पुल के समीप, ओल्ड बाइपास रोड, न्यू बाइपास के सर्विस लेन सहित दर्जनों मुहल्ला है, जहां खुलेआम बिल्डिंग मेटेरियल का कारोबार हो रहा है. लेकिन, कार्रवाई नहीं की जा रही है.
सड़क पर उड़ रहे है धूल
करबिगहिया से मीठापुर बस स्टैंड जाने वाली सड़क पर फ्लाइ ओवर और सड़क बनाया जा रहा है, जो निर्माणाधीन है. निर्माण एजेंसी को सेवा-शर्त के अनुसार सुबह-शाम सड़क पर पानी के छिड़काव करना है और ढक कर पाइलिंग व अन्य निर्माण कार्य पूरा करना है. लेकिन, नहीं पानी का छिड़काव हो रहा है और नहीं ढक कर काम किया जा रहा है.
नहीं ढका जा रहा है कचरा
नगर निगम के सभी अंचलों में हाइवा व टाटा-407 ट्रक से कचरे का उठाव हो रहा है. इन हाइवा व ट्रक को ढक कर कचरा ले जाना है. इसको लेकर नगर आयुक्त ने सभी कार्यपालक पदाधिकारियों को निर्देश दिये है. लेकिन, शत प्रतिशत गाड़ियां ढक कर कचरा नहीं ले जाती है.स्थिति यह है कि कचरा लिये वाहन के पीछे चल रहे आमलोगों को काफी परेशानी हो रही है.
निगम क्षेत्र में छोटे-बड़े भवनों के निर्माण को ढक कर करना है. इसको लेकर निगम की ओर से आम सूचना भी जारी की गयी है. लेकिन, बिल्डर हो या फिर आम लोग ढक कर भवनों का निर्माण नहीं कर रहे है. वहीं, सरकारी एजेंसियां भी ढक कर निर्माण कार्य नहीं कर रही है. इससे राजधानी के हवा में धूल-कण का स्तर काफी बढ़ गया है. लेकिन, इन बिल्डरों, आमलोगों व एजेंसियों पर कार्रवाई नहीं की जा रही है.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >