पटना : पंचायतों के विकास के लिए भेजी गयी राशि में से 18 हजार करोड़ के हिसाब की खोज में पंचायती राज विभाग जुटा है. पंचायतों को दी गयी कितनी राशि खर्च की गयी, कितनी नहीं खर्च हुई, जिस राशि उपयोग नहीं की गयी तो उसकी स्थिति क्या है, इसकी पड़ताल शुरू हो गयी है.राज्य के 14 जिलों में राशि की उपयोगिता को लेकर स्थिति गंभीर है. पंचायती राज विभाग की समीक्षा के बाद इस बात का खुलासा हुआ है.
विभाग के प्रधान सचिव अमृत लाल मीणा ने जिलों को यथा शीघ्र राशि का ब्योरा उपलब्ध कराने का सख्त निर्देश दिया है. पंचायती राज विभाग के प्रधान सचिव अमृत लाल मीणा ने जब इसकी समीक्षा की तो पता चला कि के बाद पंचायती राज विभाग लंबित उपयोगिता प्रमाणपत्रों के मामले में दूसरे स्थान पर है.
सबसे अधिक लंबित उपयोगिता प्रमाणपत्र वाले जिले वैशाली, रोहतास, नवादा, नालंदा, पूर्वी चंपारण, समस्तीपुर, सीतामढ़ी, गया, मुजफ्फरपुर, मधुबनी, पश्चिम चंपारण, पटना, सारण और सीवान प्रमुख हैं. प्रधान सचिव ने सभी जिलों को सख्त निर्देश दिया है कि लंबित उपयोगिता प्रमाणपत्र का जल्द समायोजन करें. जो राशि खर्च हुई है उसका ऑडिट करायें और शेष राशि कोषागार में जमा कराकर उसका विपत्र विभाग को भेज दें. साथ ही जिला पंचायती राज पदाधिकारियों को जिला स्तर पर कैशबुकों की नियमित रूप से जांच करने का भी निर्देश दिया गया.
