पटना : यूं तो दीपावली खुशियों का त्योहार है, लेकिन रोशनी के इस पर्व में छोटी छोटी गलती बड़ी समस्या खड़ी कर सकती है.कई बार दीया जलाने, पटाखे-फुलझड़ी चलाने की वजह से छोटी मोटी घटना हो जाती है. ऐसे में क्या करें? विशेषज्ञ चिकित्सकों की इन सलाह को मानकर आप दीपावली का पर्व सुरक्षित ढंग […]
By Prabhat Khabar Digital Desk | Updated at :
पटना : यूं तो दीपावली खुशियों का त्योहार है, लेकिन रोशनी के इस पर्व में छोटी छोटी गलती बड़ी समस्या खड़ी कर सकती है.कई बार दीया जलाने, पटाखे-फुलझड़ी चलाने की वजह से छोटी मोटी घटना हो जाती है. ऐसे में क्या करें? विशेषज्ञ चिकित्सकों की इन सलाह को मानकर आप दीपावली का पर्व सुरक्षित ढंग से मना सकते हैं. खुशियों के इस बड़े त्योहार पर अपना और अपनों का ख्याल रखकर इसे बेहतर तरीके से मनाया जा सकता है.
आतिशबाजी में तेज आवाज से कान के पर्दे फट सकते हैं. आप इससे दूर रहें. पटाखे से सल्फर डाइऑक्साइड, और कार्बन डाइऑक्साइड जैसी गैस निकलती हैं जो आपके सांस के साथ नाक से होते हुए फेफड़े में चली जाती है. इसके कारण एक परत नाक में बन जाती है जिससे उसका हवा को साफ कर सांस लेने का काम नहीं होता है. धुएं से बचने के लिए मास्क पहन कर रहें.
डॉ सुनील सिंह, वरिष्ठ नेत्र चिकित्सक की राय
सात से दस साल तक के बच्चों को पटाखों से दूर रखें.
अपने सुपरविजन में ही पटाखे चलाने दें.
पटाखे चलाने वाली जगह पर पानी अवश्य रखें.
बारूद आंख में जाये तो ठंडे पानी छपके मारकर धोएं.
आंख न खुले तो जबरदस्ती न करें.
बम या छर्रे वाले पटाखे आंख में गए तो पुतली फटने का खतरा होता है, इससे बचें.
धुएं से एलर्जी होती है, आखों का सूखापन बढ़ेगा.
डॉ विकास शंकर, एसोसिएट प्रोफेसर, चर्म रोग विभाग, एनएमसीएच की सलाह
बच्चों को सिखाएं कि हाथ में पटाखे चलाने पर आपका हाथ बेकार हो सकता है.
जलने पर सबसे पहले नल के पानी से धोएं और एंटी बायोटिक लगाकर टेटनस की सूई लगा दें.
टूथपेस्ट, हल्दी और कोई अन्य चीज जली हुई चीज पर न लगाएं, इससे घाव डैमेज हो जायेगा.