पटना : नयी लघु खनिज नियमावली पर रोक के बाद खनन के लिए निविदा की प्रक्रिया अधर में लटक गयी है. पटना में इस वर्ष दिसंबर में बालू खनन की लीज समाप्त हो जायेगी.
खनन के लिए लीज समाप्त होने से पहले निविदा प्रक्रिया पूरी हो जानी थी, जिससे खनन के लिए लाइसेंस लेने वाले ठेकेदार पर्यावरण व प्रदूषण समेत अन्य आवश्यक लाइसेंस ले सकें. लेकिन नयी नियमावली पर रोक लगने से प्रक्रिया ठप हो गयी है. हालांकि कोर्ट में 21 अक्तूबर को सुनवाई है, उम्मीद है कि कुछ रास्ता निकलेगा जिससे निविदा हो सकेगी.
बालू खनन पर रोक और नयी निविदा के रास्ते नहीं खुले तो राज्य में बालू संकट आना तय है. इसका असर निर्माण कार्यों पर पड़ेगा. हालांकि जिला खनन पदाधिकारी सुरेंद्र सिन्हा का कहना है कि अभी बालू का भंडारण है. सितंबर महीने में बारिश और जल जमाव और गंगा में जलस्तर बढ़ने की वजह से अभी सब कुछ ठप पड़ा हुआ है. निर्माण कार्य भी धीमी गति से हो रहा है. उनका कहना है कि अभी बालू का भंडारण है. लेकिन मामला लंबा गया तो मुश्किल होगी.
फिलहाल सबकी नजर 21 अक्तूबर की सुनवाई पर है. यहां बता दें कि एक रिट याचिका पर सुनवाई के दौरान नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने नयी नियमावली पर तत्काल रोक लगा दी थी. छह सितम्बर 2019 को सुनवाई के दौरान एनजीटी ने नदियों को विखंडित करने की सरकार की नीति पर विरोध जताया था. एनजीटी ने बिहार सरकार के इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन बताया व सरकार को अपना पक्ष रखने के लिए 21 अक्तूबर को सुनवाई की तारीख निर्धारित की है. सुनवाई के बाद आगे की प्रक्रिया के शुरू होने के आसार हैं.
