पटना : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कृषि विभाग को एक सप्ताह में सूखे और बाढ़ से नष्ट हुई फसलों की समीक्षा करके इसकी रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है. राज्य में पिछले एक महीने के दौरान सूखे के कारण कई इलाकों में फसलें नहीं लगी, तो दूसरी तरफ बाढ़ की वजह से बड़े पैमाने पर फसलों को नुकसान पहुंचा है.
मुख्यमंत्री मंगलवार को अपने सरकारी आवासीय कार्यालय में बाढ़, सुखाड़ और कृषि इनपुट अनुदान की नीति से संबंधित मामले की कृषि विभाग के अधिकारियों के अलावा अन्य के साथ उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की. इस दौरान सीएम ने कहा कि संबंधित पीड़ित किसानों को कृषि इनपुट अनुदान की राशि का भुगतान किया जायेगा, ताकि वे रबी फसल की खेती बेहतर ढंग से कर सकें. इस दौरान कृषि विभाग के सचिव एन सरवण कुमार ने एक प्रेजेंटेशन भी दिया.
राज्य सरकार ने 13 सितंबर को कैबिनेट की हुई बैठक में यह निर्णय लिया था कि पिछले वर्ष की तरह 15 अक्तूबर, 2019 की तारीख को आधार मानते हुए फिर से प्रखंडों में तीन बिंदुओं के आधार पर फसलों के उपज की समीक्षा की जायेगी. इसमें खेती की गयी जमीन या जिसमें फसलों की बुआई हुई है, उसमें दरार उत्पन्न होगी, फसलों के मुरझाने का प्रभाव और ऊपज में 33% या इससे अधिक की कमी की समीक्षा करने के बाद ही संबंधित प्रखंडों को को सूखाग्रस्त घोषित किया जायेगा. साथ ही इसके आधार पर ही क्षतिग्रस्त फसलों के लिए कृषि इनपुट अनुदान के वितरण का निर्णय लिया जायेगा.
इसके आधार पर ही सरकार फसलों के नुकसान का आकलन करेगी और इसके लिए राहत देने की रणनीति तैयार करेगी. बैठक में कृषि मंत्री प्रेम कुमार, मुख्य सचिव दीपक कुमार, विकास आयुक्त अरुण कुमार सिंह, आपदा प्रधान सचिव प्रत्यय अमृत, सीएम के प्रधान सचिव चंचल कुमार, वित्त विभाग के प्रधान सचिव डॉ एस सिद्धार्थ, सीएम के सचिव मनीष कुमार वर्मा व अनुपम कुमार, परिवहन सचिव संजय अग्रवाल, कृषि निदेशक आदेश तितरमारे समेत अन्य अधिकारी मौजूद थे.
