राज्य सरकार के सर्वे में हुआ है खुलासा
राजदेव पांडेय
पटना : राज्य में दो लाख बच्चों को एक किलोमीटर के दायरे में स्कूल नहीं मिल रहे हैं. प्राइमरी और अपर प्राइमरी क्लास के ये बच्चे 1.12 लाख से अधिक टोलों और मजरों के हैं.
सभी गरीबों के बच्चे हैं. राज्य सरकार के हालिया सर्वे में इस बात का खुलासा हुआ है. शिक्षा विभाग इस बात पर मंथन कर रहा है कि इन बच्चों को किस तरह एक किलोमीटर के दायरे में स्कूल की सुविधा मुहैया करायी जाये. भारत सरकार ने इस संबंध में राज्य से जानकारी भी तलब की है.
आधिकारिक जानकारी के मुताबिक प्राइमरी में करीब 1.14 लाख बच्चे अपने घर से एक किलोमीटर के दायरे के में पढ़ने नहीं जा पा रहे हैं. इसी तरह अपर प्राइमरी के 85. 6 हजार से अधिक बच्चे प्राइमरी के बच्चों की भांति दूर के स्कूलों में पढ़ने के लिए विवश हैं. नियमानुसार इन बच्चों को आरटीइ के तहत एक किलोमीटर के दायरे में अनिवार्य तौर पर स्कूल की सुविधा मिलनी चाहिए.
3320 टोलों में स्कूल नहीं
प्राइमरी कक्षाओं की बात करें तो 1. 8 लाख टोलों के बच्चों को अनिवार्य शिक्षा के दायरे में किसी- न- किसी स्कूल से जोड़ दिया गया है. कुल टोलों में से 3320 टोले ऐसे हैं,जहां स्कूल ही नहीं हैं. जिन टोलों में स्कूल नहीं हैं, उन्हीं में 1524 टोले ऐसे पाये गये जहां स्कूल खोले जा सकते हैं. हालांकि, वहां अभी स्कूल खोले नहीं जा सके हैं. इन टोलों के करीब 97187 बच्चों को दूर के स्कूल में जाना पड़ रहा है. शेष प्राइमरी स्कूल विहीन 1796 टोलों में किसी भी सूरत में स्कूल खोले ही नहीं जा सकते. लिहाजा वहां के 16516 बच्चों को को एक किलोमीटर के दायरे में बाहर के स्कूलों में पढ़ना पड़ रहा है.
अपर प्राइमरी
1.12 लाख से अधिक टोलों -मजरों में अपर प्राइमरी कक्षाओं के बच्चों की भी कमोवेश यही पीड़ा है. इन टोलों में 1.10 लाख टोलों के अपर प्राइमरी कक्षाओं के बच्चों को एक किलोमीटर के दायरे से बाहर के स्कूलों को जोड़ दिया गया. इसके अलावा 2035 टोलों में अपर प्राइमरी स्कूल नहीं हैं.
इनमें 967 टोले ऐसे हैं, जहां स्कूल खोले जा सकते हैं. इन टोलों में 71669 हजार से अधिक बच्चों को आरटीइ नार्म्स के मुताबिक स्कूल नहीं मिल पा रहे हैं. ये बच्चे दूर के स्कूलों में जा रहे हैं. शेष 1068 टोले ऐसे हैं, जहां अपर प्राइमरी स्कूल खोले भी नहीं जा सकते हैं. लिहाजा ऐसे 13934 बच्चों की विवशता है कि उन्हें हर हाल में दूर के ही स्कूल में पढ़ना होगा. विभाग स्कूल मुहैया नहीं करा सकता.
