पांच वर्षों से पहले इपीएफ खाता बंद करने से नुकसान

पटना : कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (इपीएफओ) ने पांच साल से पहले इपीएफ खाता बंद कर पूरा पेमेंट लेने पर (टैक्स डिडक्शन एट सोर्सेज) टीडीएस कटौती के नियम में बदलाव कर कटौती नियम सख्त कर दिया है. इस अवधि में पेमेंट लेने पर 10 से 34 फीसदी तक का टैक्स काटा जायेगा. हालांकि नौकरी के […]

पटना : कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (इपीएफओ) ने पांच साल से पहले इपीएफ खाता बंद कर पूरा पेमेंट लेने पर (टैक्स डिडक्शन एट सोर्सेज) टीडीएस कटौती के नियम में बदलाव कर कटौती नियम सख्त कर दिया है. इस अवधि में पेमेंट लेने पर 10 से 34 फीसदी तक का टैक्स काटा जायेगा. हालांकि नौकरी के पांच साल पूरे होने के बाद से सेवानिवृति होने तक पैसे निकालने पर कोई कटौती नहीं होगी.

इस बात की जानकारी इपीएफओ के अपर केंद्रीय आयुक्त (बिहार-झारखंड) राजीव भट्टाचार्या ने दी. उन्होंने बताया कि पिछले कुछ सालों से ठेके और आउटसोर्सिंग पर रखे गये कर्मचारी जल्दी-जल्दी अपने खाते बंद कर रहे हैं. इसे रोकने के लिए इपीएफओ ने यह कदम उठाया है. वैसे यह कदम कर्मचारियों के हित में ही है.
उन्होंने बताया कि अब अगर पांच साल से पहले इपीएफ खाता बंद कर रहे हैं, तो पैन और फॉर्म 15-जी लगाना न भूलें. ये दोनों दस्तावेज देने पर 10 फीसदी टीडीएस कटेगा. वर्ना 34.608 फीसदी टैक्स काटा जायेगा.
भट्टाचार्या ने बताया कि पांच साल के बाद या सेवानिवृत होने पर पेमेंट लेने पर पैन और फॉर्म 15-जी अनिवार्य नहीं होगा. इनके बिना ही पूरा पेमेंट बिना किसी टैक्स कटौती के किया जायेगा. इपीएफओ ने संयुक्त दावा प्रपत्र में सेवानिवृति से एक वर्ष पहले और वरिष्ठ पेंशन बीमा योजना में निवेश के लिए 90 फीसदी एडवांस का प्रावधान भी लागू कर दिया है.
दूसरी ओर इपीएफओ के एक वरीय अधिकारी ने नाम न छापने के शर्त पर बताया कि टीडीएस के प्रावधान में छूट दी जानी चाहिए, क्योंकि हर वर्ष बिहार में सैकड़ों कर्मचारियों के इपीएफ खाते पांच साल से पहले ही बंद हो जाते हैं. वे पैन कार्ड भी नहीं बनवा पाते हैं. इसलिए इसमें छूट दी जानी चाहिए. यह बदलाव केंद्रीय कार्यालय के स्तर पर संभव है. इसके लिए श्रमिक संगठनों को आगे आना चाहिए.

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