पटना : बिहार में स्वास्थ्य सेवाओं के तेजी से हो रहे विस्तार के बाद भी समान या कम जनसंख्या वाले राज्यों की तुलना में अब भी यहां बड़ी खाई बरकरार है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार प्रति हजार की आबादी पर एक डॉक्टर होना चाहिए. 7.2 करोड़ आबादी वाले तमिलनाडु में प्रति हजार लोगों पर चार डॉक्टर उपलब्ध हैं. जबकि स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव संजय कुमार के मुताबिक अभी बिहार में 3207 लोगों पर एक डॉक्टर मौजूद हैं.
इसी तरह रजिस्टर्ड डॉक्टर, मेडिकल कॉलेज, ब्लड बैंक व आइ बैंक के मामलों में भी बिहार अभी दक्षिण राज्यों से काफी पीछे है. बिहार को दक्षिण भारत के राज्यों जैसी स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए अपनी रफ्तार को चार गुनी बढ़ानी होगी, तब जाकर उनकी बराबरी पर पहुंचा जा सकता है. राज्य में 2013 के बाद दो निजी मेडिकल कॉलेजों को इस सत्र में मान्यता दी गयी है.
