कृष्ण
पटना : पुनपुन बराज योजना का काम 21 साल बाद भी अधूरा है. इसकी लागत भी करीब 20 करोड़ रुपये से बढ़कर 658 करोड़ रुपये हो गयी है
इस योजना के अधूरा रहने की मुख्य वजह भूमि अधिग्रहण की समस्या बतायी जा रही है. इस कारण 1998 में शुरू हुई इस योजना को पूरा करने की समय- सीमा बढ़ती गयी और इसे अंतिम रूप से मार्च, 2019 में पूरा करने का लक्ष्य था.
हालांकि, यह समय- सीमा भी फेल हो गयी. इसे बनने से अरवल जिला के करपी प्रखंड, जहानाबाद जिला के जहानाबाद और रतनीफरीदपुर प्रखंड सहित पटना जिले के पालीगंज, मसौढ़ी और पुनपुन प्रखंड के 13 हजार 680 हेक्टेयर इलाके में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होने का अनुमान था. सूत्रों का कहना है कि इस योजना के लिए 834.49 हेक्टेयर जमीन की जरूरत थी, लेकिन फिलहाल 749.26 हेक्टेयर जमीन मिल सकी है. इसमें से केवल 382.90 हेक्टेयर का मुआवजा जमीन मालिकों को मिल सका है.
जल संसाधन विभाग के सूत्रों का कहना है कि इस योजना पर 1998 में काम शुरू हुआ था. बैराज निर्माण का अधिकतर काम पूरा हो चुका है, लेकिन पूरे बैराज का निर्माण होने के बाद ही इसका इस्तेमाल किया जा सकेगा.
