शशिभूषण कुंवर
कंट्रोल स्पेस में राज्य के पायलटों को मिलता है प्रशिक्षण
पटना : बिहार उड्डयन संस्थान में इस वर्ष निजी व कॉमर्शियल विमान चालक (सीपीएल) का प्रशिक्षण लेने वाले पायलटों के लिए टरबाइन इंजन वाले किंग एयर के चार्ली-90 विमान पर प्रशिक्षण का मौका मिलेगा. पहले कोर्स पूरा करनेवाले पायलट भी इसका लाभ उठा सकते हैं.
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने प्रशिक्षण के लिए इस विमान को देने की अनुमति दे दी है. उड्डयन संस्थान की ओर से इस सत्र में कुल 60 पायलटों के प्रशिक्षण की तैयारी है. इसमें पीपीएल प्रशिक्षण के लिए 40 व सीपीएल प्रशिक्षण के लिए 20 सीटों पर प्रशिक्षण दिया जायेगा.
पायलट बनने की ख्वाहिश रखनेवाले विद्यार्थियों को यह सुनहरा मौका मिल रहा है. विमानन क्षेत्र में कैरियर की तलाश करनेवाले
विद्यार्थियों को चार अक्तूबर तक आवेदन करने का मौका दिया गया है. इसके लिए पांच हजार प्रति घंटा शुल्क देना होगा. कैबिनेट विभाग ने इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी है. बिहार उड्डयन संस्थान की आेर से पायलटों के प्रशिक्षण के लिए आनेवाले विद्यार्थियों को पटना हवाई अड्डा पर कंट्रोल स्पेस में प्रशिक्षण का अवसर मिलता है. इसमें एटीसी के वाच टावर के नियम कानून के तहत प्रशिक्षण का मौका मिलता है. बाद में ऐसा प्रशिक्षण पाने वाले पायलटों को बड़े एयरक्राफ्ट में जाने का मौका मिलता है. सिविल विमानन विभाग ने राज्य के विद्यार्थियों से इसके लिए आवेदन पत्र आमंत्रित किये हैं.
कराया जायेगा प्रशिक्षण कोर्स : पीपीएल व सीपीएल के विद्यार्थियों को इंस्ट्रूमेंट रेटिंग के साथ प्रशिक्षण कोर्स कराया जायेगा. निजी विमान चालक (पीपीएल) कोर्स करनेवाले विद्यार्थियों की न्यूनतम योग्यता 10वीं कक्षा उत्तीर्ण होनी चाहिए और उनकी उम्र चार अक्तूबर को 16 वर्ष होनी चाहिए. प्रशिक्षण की अवधि कुल 60 घंटे की निर्धारित की गयी है. पूरा कोर्स करने पर कुल तीन लाख रुपये खर्च होंगे. नामांकन में राज्य सरकार के आरक्षण के प्रावधानों का पालन किया जायेगा. कॉमर्शियल पायलटों के लिए प्रशिक्षण की अवधि कुल 200 घंटे की निर्धारित की गयी है.
कॉमर्शियल पायलट का प्रशिक्षण कोर्स पूरा करने पर 10 लाख खर्च होंगे. कमर्शियल पायलट के लिए मान्यता प्राप्त बोर्ड से गणित व भौतिकी के साथ प्लस-टू की डिग्री अनिवार्य है. इस कोर्स के लिए आवेदन करनेवालों की उम्र चार अक्तूबर को 17 वर्ष निर्धारित की गयी है. आधिकारिक सूत्रों की मानें, तो यहां से एक-सवा साल में बच्चे कोर्स पूरा कर लेते हैं. इसमें बच्चों की क्षमता पर है कि वह ग्राउंड कोर्स के साथ फ्लाइंग का काम कितना तेजी से पूरा करते हैं.
