संभावित बाढ़ की पहले ही मिल जायेगी जानकारी

पटना : भारत और नेपाल की कॉमन नदियों में आने वाली बाढ़ की पहले से जानकारी हासिल करने के लिए भारत ने नेपाल में 281 स्टेशन खोलने का प्रस्ताव नेपाल के सामने रखा है. इससे मिलने वाला डेटा भारत में बाढ़ प्रबंधन में मददगार साबित होगा. साथ ही इसके आधार पर पूर्वानुमान विकसित कर बिहार […]

पटना : भारत और नेपाल की कॉमन नदियों में आने वाली बाढ़ की पहले से जानकारी हासिल करने के लिए भारत ने नेपाल में 281 स्टेशन खोलने का प्रस्ताव नेपाल के सामने रखा है. इससे मिलने वाला डेटा भारत में बाढ़ प्रबंधन में मददगार साबित होगा. साथ ही इसके आधार पर पूर्वानुमान विकसित कर बिहार और उत्तर प्रदेश में बाढ़ के खतरे को कम किया जा सकेगा.

इस संबंध में दोनों देशों के उच्चाधिकारियों की दो दिन पूर्व पटना में संयुक्त बैठक हुई. इसमें कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं पर सहमति बनी है. उन बिंदुओं को मंजूरी के लिए दोनों देशों ने अपने-अपने मंत्रालय में भेज दिया है. केंद्रीय जल आयोग के सूत्रों का कहना है कि इन सभी 281 स्टेशन के डेटा का इस्तेमाल भारत सरकार बाढ़ के पूर्वानुमान के लिए करेगी.
इस संबंध में एक मॉडल विकसित किया जायेगा. इन सभी स्टेशन से मौसम व बारिश के संबंध में रियल टाइम डेटा को भारत के साथ आधिकारिक रूप शेयर करने के लिए नेपाल से कहा जायेगा. कोसी, नारायणी, कर्णाली, राप्ती, महाकाली नदियां नेपाल के बाद भारत में अलग-अलग नामों से बहती हैं. उत्तर बिहार में कोसी के अलावा गंडक, बागमती, कमला, बलान व महानंदा में नेपाल में बारिश से अक्सर बाढ़ आती है.
ये रहे मौजूद
बैठक में नेपाल सरकार में ऊर्जा, जल संसाधन व सिंचाई मंत्रालय के संयुक्त सचिव रामगोपाल खरबूजा, जल व ऊर्जा आयोग के सीनियर डिवीजनल इंजीनियर महेश्वर श्रेष्ठ, सीनियर डिवीजनल मैटेरियोलॉजिस्ट सुमन कुमार रेगमी, पटना स्थित केंद्रीय जल आयोग में एलजीबीओ के चीफ इंजीनियर अतुल कुमार नायक, लखनऊ स्थित केंद्रीय जल आयोग में यूबीजीओ के चीफ इंजीनियर भोपाल सिंह, नयी दिल्ली स्थित केंद्रीय जल आयोग में डीटीइ एफसीए-2 के डायरेक्टर रीतेश खट्टर, लखनऊ स्थित एफएमआइएससी के इंजीनियर प्रभात कुमार दूबे व बिहार स्थित केंद्रीय जल आयोग में एफएमआइएससी के ज्वाइंट डायरेक्टर अनिल कुमार शामिल रहे.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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