बिहटा : राजधानी पटना से सटे महज 30 किलोमीटर पर बसा बिहटा अंचल कार्यालय कर्मियों की कमी से जूझ रहा है. इस कारण सरकारी कार्यों के संपादन एवं राजस्व उगाही में सरकार को नुकसान तो ही रहा है. इससे आम जनता, छात्रों एवं किसानों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
एक तरफ बिहटा अंचल में चल रहे सरकारी परियोजना व हो रहे चौतरफा विकास की वजह से कार्यालय में काम काफी बढ़ा है, लेकिन दूसरी तरफ आलम यह है कि एक राजस्व हल्का कर्मचारी के जिम्मे अंचल की 26 पंचायत सहित अंचल निरीक्षक की जिम्मेदारी मिली हुई है. ऐसे में दिन पर दिन कार्यालयों में फाइलों का बोझ बढ़ता जा रहा है. कई महीनों से प्रधान सहायक व अंचल निरीक्षक का पद रिक्त है.
प्रधान सहायक का प्रभार अंचल के नाजिर को प्रभार में रखकर संचालित किया जा रहा है, जबकि स्थायी अमीन के नहीं रहने से अंचल के प्रभार में एक ही अमीन के रहने से भूमि विवाद के मामले निबटाने में भारी परेशानी होती है. सबसे हास्यपद स्थिति तो राजस्व हल्का कर्मचारी पद का है. बिहटा अंचल में 26 कर्मचारी होने चाहिए, लेकिन महज एक कर्मचारी पूरे अंचल में है. इसके जिम्मे अंचल निरीक्षक का भी प्रभार है.
अंचल में स्थापना कर्मचारी सात होना चाहिए , लेकिन तीन से काम चल रहा है. आरटीपीएस से किसी भी तरह के प्रमाणपत्र प्राप्त करने से पूर्व अनुशंसा कराने व मालगुजारी रसीद कटाने के लिए आम जनता, किसानों एवं छात्रों को कई बार हल्का से लेकर अंचल कार्यालय तक कई बार चक्कर लगाना पड़ता है.
बावजूद उनके कार्यों का संपादन तो दूर अपने राजस्व कर्मचारी का दर्शन तक नहीं हो पाता है. सीओ सुनील कुमार वर्मा ने बताया कि कर्मचारियों की कमी व सीआइ के नहीं रहने के कारण कार्यालय का सारा काम बाधित है. अंचल कार्यालय के वस्तु स्थिति से वरीय अधिकारियों को अवगत करा दिया गया है.
