पटना : उपमुख्यमंत्री सह वित्त मंत्री सुशील कुमार मोदी ने तेजस्वी यादव का नाम लिये बिना उन पर तंज कसते हुए कहा है कि नेता प्रतिपक्ष ने 29 साल की उम्र में हजार करोड़ रुपये की संपत्ति खड़ी कर ली.
यह समाज में गैरबराबरी का बड़ा उदाहरण है. उपमुख्यमंत्री बुधवार को बिहार विधान परिषद में भोजनावकाश के बाद विनियोग विधेयक (3) को विचार के लिए सदन पटल पर रखने और एक खरब 43 अरब 30 अरब रुपये का प्रथम अनुपूरक व्यय विवरण पेश करने के दौरान बोल रहे थे. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की उपस्थिति में विनियोग विधेयक (संख्या 3) ध्वनिमत से पारित हो गया. सुशील कुमार मोदी ने कहा कि करीब एक दर्जन लोगों ने लाखों की जमीन नेता प्रतिपक्ष को दान में दे दी. इसमें विधानसभा में चतुर्थवर्गीय कर्मचारी भी शामिल हैं. नेता प्रतिपक्ष की संपत्ति में तीन एकड़ जमीन में सात मंजिला होटल भी है.
बारिश से टूटे तटबंध
प्रथम अनुपूरक व्यय विवरणी के वाद-विवाद में डॉ रामचंद्र पूर्वे के बाढ़ में तटबंधों के टूटने के मुद्दे पर उपमुख्यमंत्री ने कहा कि इस बार नेपाल और बिहार में होने वाली बारिश से तटबंध टूटे हैं. वहीं करीब एक हजार ग्रामीण सड़कें क्षतिग्रस्त हुई हैं.
वृद्धजन पेंशन योजना में आठ लाख आवेदन
प्रथम अनुपूरक व्यय का विवरण देते हुए सुशील कुमार मोदी ने बताया कि यह एक खरब 43 अरब 30 अरब रुपये का है. इसमें से मुख्यमंत्री वृद्धजन पेंशन योजना में तीन अरब 84 करोड़ रुपये का प्रावधान है. इसके लिए अब तक आठ लाख आवेदन मिले हैं. उन्होंने सभी सदस्यों से आग्रह किया कि वे सुनिश्चित करें कि उनके क्षेत्र में एक भी वृद्ध नहीं छूटे.
वाहन का एक मुश्त शुल्क 15 वर्षों के लिए : संतोष
परिवहन मंत्री संतोष कुमार निराला ने बताया कि राज्य में गाड़ियों के निबंधन प्रमाणपत्र 15 वर्षों के लिए दिया जाता है. इस अवधि के पूरा होने के बाद पुन: उस वाहन का निबंधन किया जाता है.
बिहार मोटर वाहन करारोपण (संशोधन) विधेयक 2019 में वाहन मालिकों की शंकाओं को दूर किया गया है. संशोधन विधेयक में यह स्पष्ट किया गया है कि निबंधन के समय एक मुश्त ली जाने वाली राशि 15 वर्षों के लिए है और इसमें अवधि की गणना वाहन के प्रथम निबंधन की तिथि से की जायेगी. उन्होंने सदन को बताया कि बिहार में राजस्व की प्राप्ति करने वालों विभागों में से एक है. परिवहन विभाग राजस्व की वसूली कर के माध्यम से, शुल्क के माध्यम से, शमन के माध्यम से करता है. राज्य में गाड़ियों के निबंधन प्रमाणपत्र 15 वर्षों के लिए दिया जाता है. इस अवधि के पूरा होने के बाद पुन: निबंधन किया जाता है.
इसी क्रम में प्रथम निबंधन के समय वाहन स्वामियों से एकमुश्त कर लिये जाने का प्रावधान है. लेकिन बिहार मोटर वाहन करारोपण अधिनियम, 1994 में स्पष्ट अवधि का उल्लेख नहीं रहने के कारण वाहन स्वामियों द्वारा पूछताछ की जाती है कि यह एकमुश्त कर कितने दिनों के लिए होगा. वाहन स्वामियों में अवधि को लेकर एक संशय की स्थिति बनी रहती थी. राज्य सरकार ने इस बात को समझा तथा उन्हें यह संशय की स्थिति से बाहर करने का फैसला किया. एकमुश्त कर का अर्थ 15 वर्षों के लिए लिया जाने वाला कर होगा.
