पटना : भाजपा और जदयू का गठबंधन बना रहेगा, नीतीश के नेतृत्व में ही लड़ेंगे विधानसभा का चुनाव : सुशील मोदी

पटना : जदयू और भाजपा के रिश्ते को लेकर एक दिन पहले हुई बयानबाजी पर विराम लगाते हुए सोमवार को उपमुख्यमंत्री व भाजपा के वरिष्ठ नेता सुशील कुमार मोदी ने कहा, अगला विधानसभा का चुनाव भी दोनोें दल मिलकर लड़ेंगे. विधानसभा में विनियोग विधेयक पर जवाब के दौरान विपक्ष की टोका-टोकी के बीच उपमुख्यमंत्री ने […]

पटना : जदयू और भाजपा के रिश्ते को लेकर एक दिन पहले हुई बयानबाजी पर विराम लगाते हुए सोमवार को उपमुख्यमंत्री व भाजपा के वरिष्ठ नेता सुशील कुमार मोदी ने कहा, अगला विधानसभा का चुनाव भी दोनोें दल मिलकर लड़ेंगे. विधानसभा में विनियोग विधेयक पर जवाब के दौरान विपक्ष की टोका-टोकी के बीच उपमुख्यमंत्री ने कहा, किसी को कोई भ्रम की स्थिति में रहने की जरूरत नहीं है. भाजपा और जदयू का गठबंधन बिना किसी बाधा के बना रहेगा. 2020 के राज्य विधानसभा का चुनाव मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में ही लड़ा जायेगा.
उन्होंने कहा कि दोनों दलों के रिश्ते को लेकर बीते दिनों कुछ-कुछ बातें कही जा रही थीं. लेकिन, मैं यह साफ कर दूं कि जदयू-भाजपा का गठबंधन मजबूत है और बना रहेगा. इसमें किसी तरह के संशय की कोई बात नहीं है. जिस समय डिप्टी सीएम यह वक्तव्य दे रहे थे, उस समय सीएम नीतीश कुमार सदन में उनके पास ही बैठे हुए थे.
मालूम हो कि रविवार को भाजपा विधान पार्षद सच्चिदानंद राय ने पार्टी नेतृत्व को जदयू से गठबंधन तोड़ लेने की सलाह दी थी. इस पर जदयू के राष्ट्रीय महासचिव पवन कुमार वर्मा ने कहा था कि भाजपा अभी तय कर ले कि उसे अकेले विधानसभा चुनाव लड़ना है या साथ में. मोदी ने किसी विपक्षी दल का बिना नाम लिये कहा कि डूबती नाव पर कौन सवार होना चाहेगा.
वह भी ऐसी नाव में, जिसमें छेद ही छेद हैं. डिप्टी सीएम ने कहा कि हमारी सरकार नली-गली योजना, ग्रामीण सड़क, बिजली, पंचायती राज, स्वच्छता मिशन जैसी तमाम जन कल्याणकारी योजनाओं में तेजी से काम कर रही है. इन सभी के सकारात्मक परिणाम 2020 में दिखेंगे. इन योजनाओं के आधार पर ही एनडीए जनता के बीच वोट मांगने जायेगा.
डिप्टी सीएम ने नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव पर जमकर हमला बोला. कहा कि विधानसभा की कार्यवाही 17 दिनों से चल रही है, लेकिन अब तक एक दिन भी नेता प्रतिपक्ष सदन में नहीं आये और न ही किसी विधायी कार्य में शरीक हुए. बजट पर किसी चर्चा में भी वह शामिल नहीं हुए.
बिना जानकारी के उनका इस तरह के गायब रहना बेहद ही निंदनीय बात है. उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष से कहा कि इस मामले में नियमावली को दिखवाने की आवश्यकता है कि नेता प्रतिपक्ष बिना किसी जानकारी के कितने दिनों तक गायब रह सकते हैं. ऐसी स्थिति में क्या कार्रवाई होनी चाहिए.

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