पटना : राज्य में पर्यावरणीय स्वीकृति के बिना चलने वाले 1200 ईंट भट्ठों पर एफआइआर दर्ज किया गया है. इनके खिलाफ कार्रवाई की जायेगी. अन्य ईंट-भट्ठों को पर्यावरणीय स्वीकृति लेने के लिए कहा गया है. वहीं सभी सामान्य चिमनी भट्ठे को 31 अगस्त 2019 तक जिग-जैग चिमनी में तब्दील करने की समय सीमा निर्धारित है.
खान एवं भूतत्व विभाग के आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि राज्य में कुल 6393 ईंट-भट्ठे हैं. इनमें से 2370 को पर्यावरणीय स्वीकृति मिली है. बिना पर्यावरणीय स्वीकृति लिए ईंट-भट्ठों से निकलने वाले धुएं में सामान्य रूप से धूलकण की मात्रा अधिक रहती है. इससे लोगों को सांस सहित कई तरह की बीमारियां होने की आशंका रहती है.
इसके समधान के लिए ही चिमनी में जिगजैग तकनीक का इस्तेमाल किया जाना है. इसमें ईंधन कम लगता है व धुआं का उत्सर्जन भी कम होता है. वहीं केंद्र सरकार के वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा 25 फरवरी को जारी अधिसूचना के मुताबिक पावर प्लांटों के 300 किमी के दायरे में मिट्टी से ईंट बनाने की जगह फ्लाइ ऐश से ही ईंट बनायी जायेगी.
क्या कहते हैं अधिकारी
खान एवं भूतत्व विभाग के उपनिदेशक संजय कुमार ने कहा है कि ईंट-भट्ठों को पर्यावरणीय स्वीकृति सिया से दी जाती है. बहुत ईंट-भट्ठा संचालकों ने सिया के पास पर्यावरणीय स्वीकृति के लिए आवेदन दिया है. ऐसे ईंट-भट्ठाें को चिन्हित किया जा रहा है और उन पर फिलहाल किसी भी तरह की कार्रवाई नहीं की जा रही है.
पानी निकासी के नाम पर नाले में बहाया पैसा
राजधानी में मॉनसून के दौरान भयंकर जलजमाव की समस्या के पीछे नालों का इंटर कनेक्शन नहीं होना बड़ी वजह है. पिछले एक दशक के दौरान शहर के कई मोहल्लों में मुख्य सड़कों से लेकर अंदर की सड़कों पर बॉक्स व भूगर्भ नालों का निर्माण कराया गया.
नगर निगम के साथ-साथ नगर आवास विकास विभाग की एजेंसी डूडा, पथ निर्माण विभाग, विधायक व एमपी फंड, पीएचइडी सहित अन्य सरकारी एजेंसियों के माध्यम से अलग-अलग निर्माण हुए. लेकिन, इन सरकारी एजेंसियों ने नाला निर्माण शुरू करने से पहले नगर निगम से अनापत्ति प्रमाणपत्र नहीं ल्रिया. नतीजतन निर्माणाधीन नालों की क्वालिटी के साथ इसकी लेवलिंग की जांच भी नहीं हो सकी.
जैसे-तैसे नाले का निर्माण कराकर करोड़ों का भुगतान कर दिया गया. स्थिति यह है कि राजधानी में पानी की तरह नाला निर्माण में आम जनता के टैक्स के पैसे को बहाया गया, जिसका लाभ शहरवासियों को नहीं मिला. इसकी वजह से लोग आज भी जलजमाव की समस्या से परेशान है. नालों की स्थिति पर पढ़िए प्रभात रंजन की एक रिपोर्ट…
लेवलिंग ठीक नहीं होने से जमता है पानी
बांकीपुर अंचल क्षेत्र के लोहानीपुर के पृथ्वीपुर और आसपास के इलाकों में भयंकर जलजमाव की समस्या बनती है. इस समस्या को निजात दिलाने को लेकर करीब ढाई करोड़ की लागत से कांग्रेस मैदान रोड के किनारे बॉक्स नाले का निर्माण कराया गया. ताकि, मोहल्ले से बारिश के पानी की निकासी आसानी से हो सके. लेकिन, नाले की लेवलिंग ठीक नहीं होने की वजह से बारिश के एक बूंद पानी की निकासी नहीं हो रही है. स्थिति यह है कि डीजल पंप के माध्यम से मोहल्लों से पानी निकाला जाता है.
नहीं होती बारिश के पानी की निकासी
नगर निगम के वार्ड संख्या 42 के मछुआ टोली, बारी पथ, आर्य कुमार रोड आदि इलाकों में डूडा की ओर से तीन करोड़ की लागत से बॉक्स नाला बनाया गया. साथ ही 30 वर्ष पहले दिनकर गोलंबर से प्रेमचंद रंगशाला की ओर जाने वाली सड़क किनारे भी बॉक्स नाला बना है. लेकिन, किसी नाले का कनेक्शन एक-दूसरे नाले से नहीं है. स्थिति यह है कि पूरे इलाके में मोहल्लों के साथ-साथ मुख्य सड़क पर जलजमाव की समस्या बन जाती है.
कनेक्शन के अभाव में नहीं निकल रहा पानी
वार्ड संख्या-29 के पोस्टल पार्क मेन रोड हो या फिर पोस्टल पार्क चौराहा, इंदिरा नगर, रामविलास चौक, बिग्रहपुर आदि इलाकों में चार-पांच करोड़ की लागत से नाला का निर्माण कराया गया. लेकिन, इन इलाकों में बनाये गये नाले एक-दूसरे से जोड़े नहीं गये. साथ ही नाले की लेवलिंग पर भी ध्यान नहीं दिया गया. नाला धीरे-धीरे ध्वस्त होता चला गया. बारिश होने पर पूरे इलाके में जलजमाव की समस्या बन जाती है.
नाले का कनेक्शन व लेवल है खराब
रबिगहिया इलाके से पानी निकालने को लेकर बाइपास रोड के किनारे करबिगहिया से राजेंद्र नगर और राजेंद्र नगर से अगमकुआं तक बॉक्स नाला बनाया गया.
पीएचइडी की ओर से चयनित एजेंसी ने करीब पांच किमी लंबी बॉक्स नाले को ठीक से कनेेक्ट नहीं किया और न हीं लेवलिंग ठीक की. स्थिति यह है कि बारिश के दिनों में सिर्फ सड़क का पानी ही नाले में गिरता है. मोहल्ले में जमा पानी की निकासी बॉक्स नाले से नहीं हो रही है. करबिगहिया इलाके में हल्की बारिश के बाद ही जलजमाव की समस्या से लोग जूझने लगते हैं.
