बरतें सावधानी. एकदिवसीय सेमिनार में विशेषज्ञों ने दिये कई अहम टिप्स
पटना : कंप्यूटर पर काम करने वाले व्यक्ति बीच-बीच में गैप लें व पलक अवश्य झपकाएं. क्योंकि, कॉर्निया को आराम नहीं मिलेगा, तो आंख की रोशनी कम हो सकती है. यह कहना है आइएसएमएसआइसीएस बिहार चैप्टर के चेयरमैन डॉ सुनील कुमार सिंह का. रविवार को आइएसएमएसआइसीएस की ओर से नेत्र रोग पर एकदिवसीय सेमिनार का आयोजन किया गया. शहर के एक होटल में आयोजित इस सेमिनार का उद्घाटन बिहार के सूचना व जनसंपर्क विभाग के मंत्री नीरज कुमार ने किया. डॉ सुनील सिंह ने कहा कि मोतियाबिंद का ऑपरेशन किसी भी मौसम में करा सकते हैं.
40 के बाद जांच कराएं
आइएसएमएसआइसीएस के नेशनल चेयरमैन डॉ अमूल्या साहू और अध्यक्ष डॉ प्रणव रंजन ने कहा कि 40 साल की उम्र के बाद व्यक्ति को आंखों की जांच समय-समय पर करानी चाहिए. वैसे लोग जिनके घर में किसी को यह बीमारी हुई है या जो डायबिटीज व हाइपरटेंशन से पीड़ित हों, उन्हें यह बीमारी होने का रिस्क अधिक होता है. डॉ नागेंद्र प्रसाद व डॉ विभूति प्रसाद सिन्हा ने कहा कि मोतियाबिंद के पकने का इंतजार नहीं करे और तुरंत सर्जरी करा लें. क्योंकि, मोतियाबिंद का एकमात्र इलाज सर्जरीहै. बनारस से आये डॉ दीपक मिश्रा ने कहा कि भारत में 1.2 करोड़ लोग ग्लूकोमा से पीड़ित है.
मंत्री नीरज कुमार ने कहा कि डॉक्टर धरती पर भगवान का दूसरा रूप हैं. इसलिए यह पेशा रोजगार नहीं बल्कि चुनौतीपूर्ण है. उन्होंने कहा कि मोतियाबिंद पर जो विचार-विमर्श चल रहा है और इस बदले परिवेश में आज बीमारी जो भी है, वह एक चुनौती की तरह है.
बिहार में जिस समय मेडिकल कॉलेज खुलना था तब नहीं खुला. लेकिन, बिहार के सीएम नीतीश कुमार बने तो राज्य में विकास हुआ. बिहार में 11 मेडिकल कॉलेज खोले गये हैं. मेडिकल से लेकर सभी विभागों में तेजी से विकास हुए हैं. मंत्री ने कहा कि जो भी मेडिकल व्यवस्था या हेल्थ के लिए आवश्यक होगा, उसे बिहार सरकार पूरा करेगी. स्वास्थ्य को बेहतर बनाना सरकार की प्राथमिकता है.
