विप में भाजपा के संजय प्रकाश ने उठाया मुद्दा
पटना : आरएसएस और उसके 18 सहयोगी संगठनों के पदाधिकारियों की खुफिया रिपोर्ट तैयार करने का खुलासा होने के बाद बिहार पुलिस बैकफुट पर आ गयी है. स्पेशल ब्रांच के एसपी के आदेश पत्र से आया सियायी भूचाल बुधवार को विधानमंडल में भी छाया रहा. विधान परिषद में शून्यकाल के दौरान और सदन के बाहर भाजपा के संजय प्रकाश ने जहां इस मामले को उठाते हुए राज्य सरकार से जांच कराने की मांग की, वहीं सदन के बाहर राजद के भोला यादव और कांग्रेस के प्रेमचंद मिश्रा ने कहा कि सरकार का यह कदम स्वागतयोग्य है.
सियासी हलचल के बीच शाम को पुलिस मुख्यालय ने सफाई दी. गृह विभाग ने भी एडीजी स्पेशल ब्रांच से इस मामले में स्पष्टीकरण मांगा है. दूसरी ओर एडीजी, स्पेशल ब्रांच जितेंद्र सिंह गंगवार ने प्रेस काॅन्फ्रेंस कर कहा कि बिना उनकी और डीजीपी व गृह विभाग की अनुमति के यह खुफिया रिपोर्ट तैयार कराने वाले एसपी (जी)के खिलाफ जांच शुरू कर दी गयी है.
उन्होंने बताया कि यह पत्र एसपी (जी) के स्तर से ही जारी हुआ है. सरकार, गृह विभाग, पुलिस मुख्यालय के स्तर से कोई जानकारी नहीं है. उनकी कोई भूमिका नहीं है. उनको अलग से आदेश या निर्देश या संकेत भी नहीं था. जिस तरीके से एसपी (जी) ने इस मामले को प्रोसेस किया, उनका सूचना मांगने का जो तरीका था, जो फॉर्मेट था, उसको देखते हुए जांच कर कार्रवाई करेंगे.
एडीजी ने कहा कि विशेष शाखा को अलग-अलग स्राेत से इनपुट मिलते हैं. सुरक्षा के संबंध में सूचनाएं प्राप्त होती है. इसी के आधार पर आगे कार्रवाई की जाती है. आरएसएस के नेताओं के नाम-पते के साथ उनके व्यवसाय की जानकारी क्यों जुटायी जा रही है, इस सवाल के जवाब में एडीजी का कहना था कि वह पत्र को लेकर कुछ नहीं कहेंगे. इनपुट मिले थे कि आरएसएस के नेताओं को खतरा है. उनकी सुरक्षा के संबंध में मिले इनपुट को साझा नहीं किया जा सकता है.
एसपी ने इसी इनपुट के आधार पर सभी को पत्र भेजा था. तरीका गलत अपनाया, वरीय अधिकारियों का अनुमोदन भी नहीं लिया. गंभीर सुरक्षा केे मामले को इतने हल्के में लिया गया. जिन अधिकारी ने यह पत्र जारी किया था, वह वर्तमान में ट्रेनिंग पर गये हुए हैं. एडीजी ने यह भी बताया कि इस बात की भी जांच की जा रही है कि यदि एसपी ने पत्र की प्रतिलिपि कब और किसे भेजी.
पहली नजर में एसपी (जी) दोषी, होगी कार्रवाई : एडीजी
एडीजी, स्पेशल ब्रांच जितेंद्र िसंह गंगवार ने कहा कि 28 मई, 2019 को जारी इस पत्र पर किसी भी वरीय पदाधिकारी की अनुमति नहीं ली गयी थी. खुद उन्हें भी मीडिया के जरिये ही इसकी जानकारी हुई है. गंगवार का कहना था कि आला अधिकारियों की अनुमति लिये बिना तत्कालीन एसपी (जी), स्पेशल ब्रांच ने इतना संवेदनशील पत्र जारी किया है. उनका सूचना मांगने के तरीका गलत था. पहली नजर में वह दोषी प्रतीत हो रहे हैं. इस गंभीर अपराध के लिए तत्कालीन एसपी (जी) पर कार्रवाई होगी.
एक महीना पहले अरवल के एसपी बनाये गये राजीव रंजन, अभी ले रहे ट्रेनिंग
पटना : आरएसएस और उससे जुड़े 18 संगठनों के पदाधिकारियों के बारे में खुफिया जानकारी जुटाने का आदेश जारी करने वाले स्पेशल ब्रांच के तत्कालीन एसपी (जी) राजीव रंजन- 1 का एक महीने पहले ही स्पेशल ब्रांच से तबादला कर दिया गया था.
14 जून को उन्हें अरवल का एसपी बनाया गया था. बिहार पुलिस सेवा के अधिकारी राजीव रंजन की कुछ समय पहले ही आइपीएस में प्रोन्नति हुई है. अभी वह राष्ट्रीय पुलिस अकादमी, हैदराबाद में आइपीएस में प्रोन्नत पुलिस पदाधिकारियों के लिए आयोजित 39वां इंडक्शन कोर्स कर रहे हैं. आठ अगस्त तक उनकी ट्रेनिंग चलेगी.
क्या है मामला
एसपी, स्पेशल ब्रांच ने 28 मई, 2019 को स्पेशल ब्रांच के सभी डीएसपी को एक पत्र जारी किया था, जिसमें सभी जिलों से आरएसएस व उसके 18 सहयोगी संगठनों के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव, कोषाध्यक्ष, संयुक्त सचिव व अन्य पदाधिकारियों के नाम, पता, फोन नंबर व व्यवसाय के बारे में जानकारी जुटाने को कहा गया है.
जिन संगठनों की जानकारी मांगी गयी है, उनमें आरएसएस के अलावा विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल, हिंदू जागरण समिति, धर्म जागरण समन्वय समिति, मुस्लिम राष्ट्रीय मंच, हिंदू राष्ट्र सेना, राष्ट्रीय सेविका समिति, शिक्षा भारती, दुर्गा वाहिनी, स्वदेशी जागरण मंच, भारतीय किसान संघ, भारतीय मजदूर संघ, भारतीय रेलवे संघ, एबीवीपी, अखिल भारतीय शिक्षक महासंघ, हिंदू महासभा, हिंदू युवा वाहिनी और हिंदू पुत्र संगठन के नाम हैं.
