छोटे अस्पतालों में सांप के डंसने से बचाव की दवाएं नहीं
अस्पतालों में आ रहे सांप डंसने के कई मामले
पटना : मॉनसून की शुरुआत के साथ शहर के अस्पतालों में सांप काटने के मामले बढ़ने लगे हैं. शहर के राजेंद्र नगर नेत्रालय, गुरु गोविंद सिंह अस्पताल, गर्दनीबाग, राजवंशी नगर व गार्डिनर रोड अस्पताल में सांप काटने के मरीज आना शुरू कर दिये हैं.
लेकिन इन अस्पतालों में एंटी स्नेक दवाओं की किल्लत हो गयी है. अस्पताल सूत्रों की मानें, तो कंकड़बाग में जलजमाव की समस्या अधिक है, जहां सांप काटने के बाद मरीज सीधे राजेंद्र नगर नेत्रालय अस्पताल में पहुंचते हैं. लेकिन यहां एंटी स्नेक दवा खत्म है. अस्पताल प्रशासन सीधे पीएमसीएच रेफर कर रहा है. जानकारों की मानें, तो छोटे सरकारी अस्पतालों में एंटी स्नेक दवाएं नहीं होने से पीएमसीएच में मरीजों का लोड बढ़ गया है. पीएमसीएच में अभी दवा मौजूद है.
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पीएमसीएच व आइजीआइएमएस पहुंच रहे हैं पीड़ित : पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल में पिछले एक हफ्ते में अब तक आठ सांप काटने के मामले आ चुके हैं. पटना के शहरी व आसपास के जिलों से मरीज पहुंच रहे हैं.
वहीं पिछले साल सिर्फ पीएमसीएच व आइजीआइएमएस में सांप काटने के 143 मामले सामने आये थे. इतना ही नहीं समय पर अस्पताल नहीं पहुंचने पिछले साल पांच मरीजों की मौत भी हो गयी थी. इधर स्वास्थ्य विभाग ने बरसात में लोगों को अलर्ट जारी करते हुए कहा है कि दिन में सावधानी बरतने के साथ ही रात को रोशनी में आने-जाने व सांप काटने पर तुरंत अस्पताल पहुंचने को कहा है.
इमरजेंसी टीम को निर्देश
पीएमसीएच के डॉक्टरों की मानें, तो उनकी इमरजेंसी टीम को निर्देश है कि स्नेक बाइट के मरीजों का इलाज प्राथमिकता के तौर पर किया जाये. क्योंकि बारिश का मौसम आते ही अस्पताल में स्नेक बाइट के केस बढ़ रहे हैं. अस्पताल के डॉक्टरों का कहना है कि सांप निकलने पर चिड़िया घर प्रशासन व वन विभाग से संपर्क किया जा सकता है. जानकारी मिलने पर विभाग की टीम मौके पर पहुंच सांप को पकड़ लेगी.
क्या कहते हैं अधिकारी
सांप काटने वाले गंभीर मरीजों को प्राथमिकता देते हुए सीधे इमरजेंसी व आइसीयू में भर्ती कर इलाज करने का निर्देश जारी किया गया है. जो मरीज आ रहे हैं उनका इलाज किया जा रहा है, कुछ मरीज ठीक होकर जा चुके हैं.
कुछ का इलाज अभी हो रहा है. उन्होंने कहा कि अगर किसी भी व्यक्ति को सांप काट ले, तो किसी भी प्रकार के संशय में नहीं रहें. तुरंत नजदीक के अस्पताल पहुंचें और इलाज शुरू कराएं. इससे मरीज के बचने कि संभावना बनी रहती है. उन्होंने कहा कि पीएमसीएच में सर्पदंश से बचने की दवा है.
-डॉ राजीव रंजन प्रसाद, अधीक्षक, पीएमसीएच
