ग्लेशियर पिघलने से पटना में गंगा का जल स्तर पिछले साल से 66 सेंटीमीटर अधिक

पटना : पटना और उसके डाउन स्ट्रीम के लिये राहत की बात है कि इस साल गंगा में कहीं धार नहीं टूटी. दरअसल इस बार उल्लेखनीय तापमान की वजह से ग्लेशियर खूब पिघले हैं, जिसका नतीजा है जून माह में नदी में औसत से ज्यादा पानी बढ़ा है. उदाहरण के लिए पटना में गांधी घाट […]

पटना : पटना और उसके डाउन स्ट्रीम के लिये राहत की बात है कि इस साल गंगा में कहीं धार नहीं टूटी. दरअसल इस बार उल्लेखनीय तापमान की वजह से ग्लेशियर खूब पिघले हैं, जिसका नतीजा है जून माह में नदी में औसत से ज्यादा पानी बढ़ा है. उदाहरण के लिए पटना में गांधी घाट पर पिछले 29 साल के औसत जल स्तर से नौ सेंटीमीटर और पिछले साल से 66 सेंटीमीटर जल स्तर अधिक है.

आधिकारिक जानकारी के मुताबिक गांधी घाट पर 20 जून का जल स्तर 42़ 60 मीटर है. इस तिथि को पिछले साल का जल स्तर 41़ 94 मीटर रहा था. इस तरह पिछले साल की तुलना में इस साल 66 सेंटीमीटर अधिक पानी है. गंगा में 29 साल के दौरान औसत जल स्तर 42़ 51 मीटर की तुलना में वर्तमान जल स्तर नौ सेंटीमीटर अधिक 42़ 60 मीटर है.
पिछले साल कम पिघले थे ग्लेशियर
जानकारों के मुताबिक पिछले साल पूर्वोत्तर खासतौर पर गंगोत्री और उसके ऊपर के हिस्से में तापमान अपेक्षाकृत कम रहा था. इसकी वजह से ग्लेशियर कम पिघले थे. लिहाजा पिछले साल गांधी घाट पर गंगा का पानी कम रहा था. बता दें कि पटना के सभी घाटों पर पानी पिछले सालों की तुलना में अपेक्षाकृत कुछ अधिक है.
गांधी घाट से जेपी सेतु की तरफ और गाय घाट के बीच गंगा की गहराई अब भी 12 से 15 मीटर है. बेशक जबरदस्त गर्मी और तेजी से पिघलते ग्लेशियर, दोनों बातें चिंता की बात हैं. लेकिन इस बार मॉनसून से पहले गंगा में सामान्य से अधिक पानी होना राहत की बात है. वह भी तब, जब इस साल बिहार लगातार तीसरे साल जबरदस्त सूखे की कगार पर है.
निश्चित तौर पर इस साल काफी गर्मी पड़ी है. लिहाजा ग्लेशियर भी अधिक पिघले हैं. इसलिए जल स्तर बढ़ रहा है. गंगा के जल स्तर में इजाफा एक अच्छा संकेत माना जाना चाहिए.
डॉ रामाकर झा, पर्यावरणविद
उतार-चढ़ाव का ट्रेंड: एक जून से सात जून के बीच गंगा का जल स्तर 42़ 030 मीटर था. आठ से नौ जून के बीच 41़ 930 मीटर तक आ गया. इसके बाद वृद्धि हो रही है.

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