पिता का बेटी को पहचानने से इन्कार

पटना. : एक पिता इतना निर्दयी कैसे हो सकता है. अपनी पत्नी और बेटी को पहचानने से इन्कार कर दें. बच्ची पिता को देख कर दौड़ कर गले लगाने जाती है लेकिन वह बच्ची को झिड़कते हुए कहता है कि वो उसे नहीं पहचानता है. ऐसे ही एक मामले की शिकायत महिला हेल्पलाइन में आयी […]

पटना. : एक पिता इतना निर्दयी कैसे हो सकता है. अपनी पत्नी और बेटी को पहचानने से इन्कार कर दें. बच्ची पिता को देख कर दौड़ कर गले लगाने जाती है लेकिन वह बच्ची को झिड़कते हुए कहता है कि वो उसे नहीं पहचानता है. ऐसे ही एक मामले की शिकायत महिला हेल्पलाइन में आयी है.

क्या था पूरा मामला
सैदपुर की रहने वाली युवती ने अपने पति के खिलाफ एक आवेदन दिया जिसमें उसने पति की दूसरी शादी के बारे में लिखा था. उसने लिखा था विद्युत बोर्ड में काम करने वाले हेमंत कुमार बसंत के साथ उसकी लव मैरेज साल 2012 में हुई थी. आठ साल की इस शादी में उसकी पांच साल की बेटी है. हाल में उसे पता चला कि पति ने 16 अप्रैल को दूसरी शादी कर ली है.
पूछने पर पति ने मारपीट की. जिसके बाद पीड़िता ने हेल्पलाइन आकर आवेदन दिया. शुक्रवार को हेल्पलाइन में दूसरी पत्नी और हेमंत कुमार बसंत को बुलाया गया. दूसरी पत्नी ने भी पति का साथ देने से इन्कार दिया और इस शादी से मुक्त होना चाहती है. वहीं पहली पत्नी अपनी शादी, बेटी के जन्म से जुड़ी कई तस्वीरें लेकर वहां पहुंची.
इससे पहले पति ने ना सिर्फ दूसरी शादी रचायी बल्कि शादी रचाने के बाद भी पहली पत्नी को धोखे में रख कर उसके साथ वट सावित्री व्रत को मनाया. पहली पत्नी जब तस्वीरें लेकर आयी तो दूसरी पत्नी ने कहा कि ये टी शर्ट तो मैंने गिफ्ट की थी. जिसके बाद पहली पत्नी ने हेल्पलाइन और अन्य अधिकारियों से इंसाफ की मांग की. बेटी पिता को देखते ही उससे लिपटने गयी तो निर्दयी पिता ने उसे पहचानने से भी इन्कार कर दिया. इससे पहले की दोनों पत्नियों के साथ उसका आमना-सामना हो उससे पहले ही वो चुपचाप किसी को बताये बिना महिला हेल्पलाइन से चला गया.
युवक पर होगी कार्रवाई
महिला हेल्पलाइन की प्रोजेक्ट इंचार्ज प्रमीला कुमारी ने बताया कि उनके पास अब दो एप्लीकेंट हो गयी हैं. पहली अपनी पति के साथ रहना चाहती है और दूसरी इस शादी से मुक्त होना चाहती है. तो हमारी ओर से जो नहीं रहना चाहती के लिए उनके लिए प्रोसेस होगा. अगर पति पहली पत्नी को रखने से इन्कार करेगा तो उस पर निश्चित तौर पर घरेलू हिंसा के अंतर्गत प्राथमिकी दर्ज होगी और फिर उसके विभाग को पूरे साक्ष्य के साथ चिट्ठी भेजी जायेगी. महिला को इंसाफ दिलाने के लिए एडवोकेट की मदद ली जायेगी.

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