पटना : कहने को अशोक राजपथ स्थित पीएमसीएच साइलेंट जोन है, लेकिन यह 24 घंटे शोर में डूबा रहता है. शाेरगूल का असर मरीजों की मनाेदशा को कितना प्रभावित करता होगा, यह सहज ही समझा जा सकता है.
बिहार पॉल्यूशन बोर्ड की 2019 रिपोर्ट के मुताबिक पीएमसीएच में ध्वनि का औसत स्तर दिन में 54 डेसीबल और रात में 49 डेसीबल तक रहता है. दिन में ध्वनि का यह स्तर सामान्य से चार डेसीबल और रात में 9 डेसीबल अधिक रहता है. गौरतलब है कि 2018 में पीएमसीएच में दिन में शोर 51 डेसीबल और रात में 48 डेसीबल तक था.
ताजा आंकड़ों के मुताबिक दूसरे बड़े अस्पताल आइजीआइएमएस में कर्कश शोर पीएमसीएच की तुलना में कहीं अधिक है, लेकिन वह साइलेंट जोन में शामिल नहीं है. इस अस्पताल में ध्वनि प्रदूषण का स्तर दिन में 60 डेसीबल और रात में 55 डेसीबल है. चूंकि आइजीएमएस और उसके आसपास का इलाका कॉमर्शियल जोन में शामिल है, इसलिए यहां के ध्वनि प्रदूषण को मानक के अंदर माना गया है.
तारामंडल में दिन में मानक से कम व रात में ज्यादा शोर : पटना के कॉमर्शियल जोन में शुमार तारामंडल क्षेत्र में ध्वनि प्रदूषण रात में मानक 55 डेसीबल से दो डेसीबल अधिक 57 तक रहता है. हालांकि इस रिपोर्ट में आश्चर्यजनक तौर पर बताया गया है कि दिन में इस इलाके में ध्वनि प्रदूषण का उच्चतम स्तर मानक 65 से एक डेसीबल कम 64 डेसीबल तक है.
विशेष फैक्ट फाइल
पटना शहर के रेसिडेंशियल जोन में ध्वनि प्रदूषण मानक से नीचे है. यहां दिन में ध्वनि प्रदूषण की मात्रा 48 और रात में 41 डेसीबल है, जो मानक स्तर से काफी कम है.
आवासीय क्षेत्र में दिन में 55 डेसीबल तक और रात में 45 डेसीबल की ध्वनि सहन योग्य मानी जाती है. इस स्तर तक मानव स्वास्थ्य पर कोई बुरा असर नहीं पड़ता है. पाटलिपुत्र स्थित कोकाकोला परिक्षेत्र में ध्वनि प्रदूषण दिन और रात में 57 डेसीबल तक है, जबकि अधिकतम ध्वनि का मानक दिन में 75 और रात में 70 डेसीबल तक सहन योग्य है.
