पटना : लोकसभा चुनाव के छठे चुनाव के चुनाव प्रचार के आखिरी दिन आरजेडी ने केंद्र और राज्य सरकार के साथ-साथ विपक्ष पर निशाना साधा. आरजेडी अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने आरक्षण की चोरी का आरोप लगाया, वहीं आरजेडी ने नियोजित शिक्षकों के खिलाफ आये फैसले के लिए केंद्र और राज्य सरकार को कटघरे में खड़ा किया. वहीं, आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव की पत्नी व पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने लालू प्रसाद यादव को समाजसेवी और समाज सुधारक बताते हुए विपक्ष पर अनाप-सनाप बोलने का आरोप लगाया. इधर, लालू के छोटे बेटे व पार्टी की कमान संभालनेवाले तेजस्वी यादव ने केंद्र और राज्य सरकार के बीच अविश्वास गहरा जाने की बात कही है.
जानकारी के मुताबिक, आरजेडी अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने शुक्रवार को ट्वीट कर कहा है कि ‘चोर चौकीदार ने अब कुर्मी, पटेल, धानुक़, कोयरी, कुशवाहा, मौर्य, दांगी व अहीर के आरक्षण की भी चोरी शुरू करवा दी है. इसके बाद अब ये पासवान, रविदास, जाटव, पासी, रज़क, मांझी, नोनिया, बिंद, बेलदार, मल्लाह, निषाद, कहार, केवट, चंद्रवंशी, मंडल और आदिवासी का आरक्षण समाप्त करेंगे.’
वहीं, राबड़ी देवी ने ट्वीट कर कहा है कि ‘पांच चरणों के चुनाव में जनता जनार्दन के आपार समर्थन से सत्ता पक्ष के लोगन के नींद हराम हो गईल बा. ई लोग आपन आपा खोल देले बा और अनाब-सनाब भाषा के इस्तेमाल करता. ई लोग सपना में भी लालू जी जईसन समाज सेवी, समाज सुधार के गरियावता लोग. बाकी जनता सब जानता.’
एक अन्य ट्वीट में उन्होंने कहा है कि ‘आगे के चुनाव में बिहार के संपूर्ण जनता गोलबंद होके गठबंधन के आपार समर्थन कर के ई लोग के जमानत जब्त कराई. ई लोग जनता के साथ धोखा कईलेबा. इनकर धोखा के जवाब में जनता गठबंधन के पक्ष में आपन मत देके उकरा जिताई. लालू जी के शुभकामना रउआ सब के साथ बा.’
नियोजित शिक्षकों को सुप्रीम कोर्ट से झटका लगने को लेकर आरजेडी ने केंद्र और राज्य सरकार पर हमला बोला है. आरजेडी ने ट्वीट कर कहा है कि ‘भ्रम में ना रहें! बिहार के नियोजित शिक्षकों को झटका सर्वोच्च न्यायालय से नहीं, नीतीश-नरेंद्र मोदी की निरंकुशता और मिलीभगत से लगा है! इनके प्रिय उद्योगपतियों पर लुटाने और गबन करके भगाने के लिए खरबों हैं पर देश के भविष्य को पढ़ाने और आत्मनिर्भर बनाने वालों के लिए धन नहीं है!’
इधर, तेजस्वी यादव ने भी नियोजित शिक्षकों को लेकर राज्य सरकार पर हमला बोला है. उन्होंने ट्वीट कर कहा है कि ‘नीतीश कुमार ने बिहार के नियोजित शिक्षकों का सर्वोच्च न्यायालय में केस जान-बूझ कर ठीक से नहीं लड़ा. नीतीश-मोदी की निरंकुशता और मिलीभगत से आज बिहार के 3.5 लाख शिक्षकों के बीच समान काम के लिए समान वेतन नहीं मिलने से शोक का लहर है.’
