पटना : दुर्घटना होने पर आधुनिक तकनीक से बने बस का हाइड्रोलिक गेट बाहर से भी खुल सकता है. इसके लिए गेट के बगल में बाहर से दो फाइबर कैप में बंद स्विच दिये रहते हैं, जिन्हें तोड़कर कोई भी व्यक्ति गेट के वैक्यूम को पंचर कर लोगों को बाहर निकाल सकता है.
सोमवार को बांकीपुर डिपो में आयोजित आपदा कार्यशाला में वॉल्वो जैसे अत्याधुनिक तकनीक से बने बस में दुर्घटना की स्थिति में बचाव के तरीके व इसके लिए निर्माता कंपनी की तरफ से दी गयी सुविधाओं के बारे में परिवहन कर्मियों को बताया गया.
वॉल्वो के कस्टमर सर्विस मैनेजर एमडब्ल्यू एंथोनी ने बताया कि इसके साथ-साथ इमरजेंसी गेट को भी बाहर और भीतर दोनों तरफ से खोला जा सकता है. प्रशिक्षण के दौरान उपस्थित लोगों को बताया गया कि बस के आगे के विंड स्क्रीन को छोड़कर सभी शीशे सॉलिड न होकर टिल्टेड ग्लास से बने होते हैं. इसके कारण हैमर के हल्के प्रहार से खिड़की का शीशा तोड़ा जा सकता है. खिड़कियों के बगल में भी छोटे-छोटे हैमर लगे होते हैं.
आग लगने पर काटा जा सकता फ्यूल व फायर कनेक्शन : एसी बस में हेवी इलेक्ट्रिसिटी लोड के कारण वायरिंग में शॉर्ट सर्किट होने और उससे आग लगने की आशंका होती है. ऐसी स्थिति से निबटने के प्रबंधों की भी परिवहन कर्मियों को जानकारी दी गयी. आग लगने पर ड्राइवर को इसकी सूचना डैश बोर्ड पर लगे इंडिकेटर से तुरंत मिल जाती है.
इसको देख फायर अलार्म बजाया जा सकता है और एक स्विच से तुरंत फ्यूल व फायर कनेक्शन को काटा जा सकता है. इस अवसर पर बीएसअारटीसी के प्रशासन मुख्य चाैधरी अनंत नारायण, संचालन परामर्शी बलिराम प्रसाद, मुख्य यांत्रिक अभियंता कुमार अनिरुद्ध व बांकीपुर डिपो के डिविजनल मैनेजर अरविंद सिंह समेत डिपो के 70 ड्राइवर, कंडक्टर व परिवहनकर्मी उपस्थित थे.
