पटना : देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी सीबीआइ मुजफ्फरपुर बालिका गृहकांड में लिप्त बड़े आराेपितों को बचाने में लगी है. सीबीआइ ने जो चार्जशीट पेश की है उसमें कई खामियां हैं और उनकी जांच अधूरी है.
इससे आरोपितों को फायदा हो सकता है. ये बातें मंगलवार को जनशक्ति भवन में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बिहार महिला समाज की अध्यक्ष सुशीला सहाय ने कहीं. प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने सीबीआइ की कार्यशैली पर गंभीर आरोप लगाये. उन्होंने कहा कि सीबीआइ की चार्जशीट में कई खामियां है. शेल्टर होम में रह रही लड़कियों ने अपने बयान में उनके साथ हुई हिंसा और जिन अपराधों का जिक्र किया है उसे भी आरोपपत्र में शामिल नहीं किया गया है.
लड़कियों ने जो बयान दिये हैं उसमें दो से अधिक लड़कियों की हत्या, सामूहिक बलात्कार, वेश्यावृत्ति, तस्करी, हत्या की कोशिश जैसे संगीन मामलों की कोई भी धारा नहीं लगायी गयी है.
सीबीआइ जानबूझ कर केस को कमजोर कर रही है : प्रेस कॉन्फ्रेंस में बिहार महिला समाज की महासचिव राजश्री किरण ने कहा कि अपने बयान में 12 से अधिक लड़कियों ने ये कहा है कि शेल्टर होम की तीन लड़कियों की गला घोट कर हत्या की गयी. सीबीआइ ने जो धारा लगायी है उसमें कमियों का फायदा आरोपित उठा कर छूट सकते हैं. उन्होंने कहा कि हमें अंदेशा है कि सीबीआइ जानबूझ कर केस को कमजोर कर रही है और कोर्ट के आदेश की अवमानना कर रही है
