खगौल : नाट्य संस्था सदा लोक मंच की ओर से दानापुर स्टेशन के बाहरी परिसर में शनिवार को नुक्कड़ नाटक ‘मुद्दा हमारा, वोट तुम्हारा’ का प्रदर्शन किया गया. नाटक में दिखाया गया है कि पांच साल तक जनता की सुधि नहीं लेने वाले नेताओं को चुनाव के समय जनता की याद आती है.
उदय कुमार द्वारा लिखित व निर्देशित नुक्कड़ नाटक में दर्शाया गया कि नेता जनता की वास्तविक समस्याओं को अनदेखा कर भावनाएं भड़काने वाले मुद्दे उछालते हैं. किसानों व आमजन से जुड़े मुद्दों पर अपनी नाकामी छुपाने के लिए आरोप-प्रत्यारोप, अनर्गल बयानों व चुनावी जुमलों में उलझा रहे हैं. अशोक गिरी, शिवम कुमार, उदय कुमार, मोहन प्रसाद, राजीव रंजन त्रिपाठी आदि ने काफी जानदार अभिनय किया.
बसंत नाट्य महोत्सव में तीन नाटकों की प्रस्तुति
मंगल तालाब पन्ना लाल मुक्ताकाश मंच में तीन दिवसीय बसंत नाट्य महोत्सव के दूसरे दिन शनिवार को तीन नाटकों की प्रस्तुति हुई. इसमें डिवाइन सोशल डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन की ओर से स्वरम उपाध्याय निर्देशित व आदर्श रंजन अभिनित एकल नाटक ‘पॉपकॉर्न’ की प्रस्तुति दी गयी.
इसमें गांव से शहर सेना में भर्ती होने आये युवक की व्यथा व व्यवस्था को चित्रित किया गया. इसके बाद स्ट्रगल पटना की ओर से सौरभ सागर लिखित व रमेश कुमार रघु निर्देशित ‘स्टेज ऑफ लाइफ’ का मंचन हुआ. फिर रंग समूह की ओर से ‘सिक्यूरिटी गार्ड’ का मंचन किया गया.
इसमें लेखक व निर्देशक कुमार उदय सिंह ने बेरोजगारी की समस्या को उकेरा. इससे पहले कार्यक्रम में महापौर सीता साहु, पार्षद कांति देवी, तरुणा राय, शोभा देवी व तारा देवी उपस्थित हुईं. मंडली संस्था की ओर से आयोजित नाट्य महोत्सव की अध्यक्षता संस्था के सचिव राकेश मिश्र ने की.
संचालन कुमार प्रेम राज वर्मा ने किया. इस मौके मंडली के गायकों में प्रेमवर्धन चतुर्वेदी, राहुल कुमार, रवि कुमार, आकाश, देवेंद्र झा, सुनील कुमार, रणधीर राय व अरुण अग्निवेश ने गीतों की प्रस्तुति दी. कार्यक्रम का समापन राकेश रंजन के धन्यवाद ज्ञापन से हुआ.
‘चंडी का वशीकरण’ का मंचन
नौबतपुर. छोटकी कोपा में मंच द्वारा आयोजित मगही नाट्य महोत्सव के पहले दिन शनिवार को ‘चंडी का वशीकरण’ नाटक का मंचन किया गया.
नाटक द्वारा मगही भाषा से दूर होते लोगों को पास लाने की अच्छी पहल की गयी है. नाटक में दिखाया गया कि चंद्रिका नामक लड़की के उग्र स्वभाव के कारण शादी नहीं होने से उसके पिता जंग बहादुर काफी चिंतित रहते हैं.
एक दिन एक युवक दीनानाथ को इस बात का पता चला तो वह अपने स्वभाव के विपरीत चंद्रिका से भी ज्यादा उग्र होकर उससे शादी कर लेता है. शुरुआती नोकझोंक के बाद दोनों में प्यार हो जाता है.
दोनों के नोकझोंक, तकरार और फिर प्यार होने के दौरान कई बार हास्य दृश्य से कलाकार दर्शकों को बांधे रखते हैं.
लेखक ने अपनी रचना से यह कहने की कोशिश की है कि कभी-कभी समझाने- बुझाने से काम नहीं चलता है. लिहाजा कभी-कभी आक्रामकता भी काम आ जाती है.
सभी कलाकारों के अभिनय की लोगों ने सराहना की. नाटक में चंद्रिका के किरदार में डिंपल कुमारी की काफी सराहना हुई. उसकी बहन बिन्नी का किरदार पूजा कुमारी , जंग बहादुर का रजनीकांत व पंडित का ओमप्रकाश फजल ने अदा किया. मंच सज्जा राहुल रवि का था.
