आइजीआइएमएस में मरीजों को परेशानी
पटना : आरा जिले के रहने वाले राकेश कुमार मिरगी से पीड़ित हैं. बेहतर इलाज के लिए परिजन इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (आइजीआइएमएस) लेकर पहुंचे. डॉक्टरों ने एमआरआइ की सलाह दी. एमआरआइ के लिए रजिस्ट्रेशन कराने पर मरीज को 42 दिन बाद की तारीख दी.
यह समस्या रोजाना सभी मरीजों के साथ देखने को मिल रही है. एमआरआइ, सीटी स्कैन व अल्ट्रासाउंड जांच कराने के लिए मरीजों को 20 दिन से डेढ़ महीने तक की लंबी वेटिंग दी जा रही है. डॉक्टरों का कहना है कि मरीजों की संख्या अधिक होने से वेटिंग की समस्या बनी हुई है. वहीं कुछ मरीजों ने देरी का कारण दलालों की मिलीभगत बताया.
नंबर आने के बाद भी जांच के लिए घंटों इंतजार : वेटिंग के बाद भी उस समय परेशानी होती है, जब नंबर आने के बाद भी एमआरआइ के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है.
मसौढ़ी के रोहित कुमार को 17 मार्च का नंबर दिया गया. रोहित को 40 दिन बाद एमआरआइ जांच कराने का नंबर मिला. रोहित सुबह 10 बजे एमआरआइ रिसेप्शन सेंटर पहुंच गये, लेकिन शाम चार बजे तक मरीज की जांच नहीं हो पायी. काफी मशक्कत के बाद शाम छह बजे जांच की गयी.
रोजाना 15 मरीजों की नहीं हो पाती है जांच : संस्थान में करीब ढाई साल पहले एमआरआइ मशीन लगायी गयी. रोजाना 20 से 30 मरीजों की जांच हो पाती है, जबकि 15 से 20 मरीजों की हर दिन जांच नहीं हो पाती है.
क्या कहते हैं अधिकारी
आइजीआइएमएस के निदेशक डॉ एनआर विश्वास ने कहा कि मरीजों की संख्या अधिक होने से एमआरआइ जांच में थोड़ी बहुत वेटिंग दी जाती है. लेकिन गंभीर मरीजों को प्राथमिकता के आधार पर तुरंत जांच कराने का आदेश जारी किया गया है. हालांकि हम कोशिश कर रहे हैं कि संस्थान के रोडियोलॉजी विभाग में एमआरआइ की एक और नयी मशीन लगायी जाये. बाकी विभागों में जो मशीनें कम हैं, उनकी भी संख्या बढ़ाने की तैयारी की जा रही है.
