प्रहलाद कुमार
पटना : लोकसभा चुनाव में बसपा व सपा का गठबंधन यूपी के साथ-साथ उत्तराखंड व मध्य प्रदेश में भी हो गया है. लेकिन बिहार में दोनों पार्टियां अलग-अलग अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही हैं. उत्तर प्रदेश में दोनों बड़ी पार्टियां होने के बाद भी वर्षों से बिहार में जमीन तैयार नहीं कर पायी हैं.
बसपा पिछले दो लोकसभा चुनाव से 40 सीटों पर उम्मीदवार खड़ा कर रही है. इसके बावजूद कहीं से भी जीत नहीं मिली. वहीं, पिछला लोकसभा चुनाव सपा भी अकेले लड़ी. अब महागठबंधन के साथ लड़ने की संभावना है.
2014 में 10 सीटों पर सपा लड़ी थी चुनाव
समाजवादी पार्टी ने शिवहर से लवली आनंद, मुंगेर से राम वचन राय, पटना साहिब से उमेश राय, पूर्णिया से मंसूर आलम, भागलपुर से पुरुषोत्तम चौबे, औरंगाबाद से रीता देवी, गया से ममता कुमारी, नवादा से सुरेंद्र राजवंशी, सीतामढ़ी से अबु दोजाना को चुनाव मैदान में उतारा था. मुंगेर व शिवहर में टक्कर देने के बाद भी कहीं से भी जीत नहीं मिल सकी थी. इसी तरह 2009 के आम चुनाव में सपा का गठबंधन राजद और लोजपा से था, लेकिन 40 सीटों में सपा को एक भी सीट नहीं दी गयी.
बसपा
सभी सीटों पर उतारा था प्रत्याशी
बसपा ने 2014 और इसके पहले 2009 मेें राज्य की सभी 40 लोकसभा सीटों पर उम्मीदवार उतारा था. लेकिन कहीं से कोई भी उम्मीदवार को सफलता नहीं मिली.
बिहार में बसपा लोकसभा चुनाव में सभी 40 सीटों पर उम्मीदवार उतारेगी. पार्टी की पकड़ जमीनी स्तर पर बढ़ी है. 2019 चुनाव हमारे पक्ष में रहेगा. उम्मीदवार जबरदस्त टक्कर देने को तैयार हैं.
लालजी मेधांकर, प्रदेश
प्रभारी, बसपा
2014 में सपा ने अकेले 10 सीटों पर उम्मीदवारों को उतारा था. कहीं-कहीं टक्कर अच्छी रही, लेकिन हमें एक भी सीट नहीं मिली. इस बार के चुनाव में सपा महागठबंधन के साथ है. पार्टी चुनाव में बेहतर करेगी.
देवेंद्र प्रसाद यादव, प्रदेश अध्यक्ष, सपा
